संस्कृति विश्वविद्यालय में कृषि के भविष्य पर मंथन: नवाचार और वैश्विक सहयोग पर जोर
संस्कृति विश्वविद्यालय के कृषि विभाग ने प्रबंधन एवं वाणिज्य विभाग के सहयोग से ‘सतत कृषि के लिए स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र’ विषय पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इस संगोष्ठी का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप की संभावनाओं, नवाचारों और वैश्विक स्तर पर विकसित हो रहे पारिस्थितिकी तंत्र पर चर्चा करना था। संगोष्ठी में अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को आधुनिक शोध, तकनीकों और वैश्विक कृषि चुनौतियों से अवगत कराया।
लेथब्रिज विश्वविद्यालय, कनाडा के अध्यक्ष व कुलपति प्रो. दिगवीर एस. जयास ने मुख्य अतिथि के रूप में संगोष्ठी का उद्घाटन किया। उन्होंने वैश्विक खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूल खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के लिए नवाचार संचालित स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को आवश्यक बताया। प्रो. जयास ने कहा कि कृषि में नवाचार और नई तकनीकों का समावेश भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
पीआई इंडस्ट्रीज एंड एफ्रिन जीएमबीएच, जर्मनी के प्रबंध निदेशक डॉ. क्लॉस कुंज ने सटीक कृषि, जैव प्रौद्योगिकी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, पुनर्योजी खेती और मूल्य-श्रृंखला संवर्धन जैसे क्षेत्रों में स्टार्टअप के बढ़ते अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में स्टार्टअप्स कृषि उत्पादकता को बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
पीआई इंडस्ट्रीज, मुंबई के कॉर्पोरेट मामलों व स्थिरता प्रमुख डॉ. के.एस. त्यागराजन ने भारत में कृषि-रसायन उद्योग के बदलते परिदृश्य पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सुरक्षित कृषि इनपुट, डिजिटल उपकरण और एआई आधारित समाधान भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में अहम होंगे। डॉ. त्यागराजन ने इस बात पर जोर दिया कि कृषि में स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देना आवश्यक है।
पीआई इंडस्ट्रीज, जर्मनी के ग्लोबल फील्ड डेवलपमेंट लीड डॉ. चक्रधर पाल ने स्वस्थ मृदा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मृदा ही दीर्घकालिक कृषि उत्पादकता की नींव है। डॉ. पाल ने मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक तरीकों और तकनीकों को अपनाने की वकालत की।
कीटनाशक पंजीकरण विशेषज्ञ डॉ. प्रफुल्ल भामरे ने नियामक मानकों, सुरक्षा परीक्षण और जीएलपी अनुपालन पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन मानकों का पालन करना आवश्यक है।
संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एम.बी. चेट्टी ने संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कहा कि सतत कृषि के लिए नवाचार और वैश्विक सहयोग अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कृषि के क्षेत्र में नए विचारों और तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।
संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. जयास और अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन करके किया। कृषि संकाय की डीन डॉ. कंचन सिंह ने स्वागत भाषण दिया, जबकि डॉ. ज्योति यादव ने अतिथि परिचय कराया। सहायक प्रोफेसर डॉ. सतीश चंद ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ संगोष्ठी का समापन किया। सूत्रों के अनुसार, इस संगोष्ठी ने कृषि के क्षेत्र में नवीनतम विकासों और भविष्य की संभावनाओं पर एक महत्वपूर्ण चर्चा मंच प्रदान किया।
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