यमुना में फ़ैक्ट्री का ज़हर: दो सैंपल फेल, सरकारी लापरवाही पर उठे सवाल
सोनीपत में सरकारी एजेंसियों की उदासीनता के कारण यमुना नदी लगातार प्रदूषित हो रही है। फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी को बिना शोधित किए सीधे नदी में बहाया जा रहा है। बड़ी औद्योगिक क्षेत्र के सीईटीपी (कामन ईफल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) से लिए गए शोधित पानी के दो नमूने जांच में फेल पाए गए हैं। इन सैंपलों में प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों की मात्रा निर्धारित मानकों से कई गुना अधिक पाई गई है।nnइस घटनाक्रम से यह स्पष्ट हो जाता है कि फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी को साफ करने के लिए स्थापित किए गए सीईटीपी अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहे हैं। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस मामले में कार्रवाई करते हुए सीईटीपी के संचालन के लिए जिम्मेदार एचएसआईआईडीसी को कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है। बोर्ड की ओर से एचएसआईआईडीसी पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।nnयह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ समय पहले आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ने हरियाणा सरकार पर यमुना में जहर मिलाने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने स्वयं यमुना जल का आचमन कर सरकार के प्रयासों को दर्शाया था और संबंधित जिलों के उपायुक्तों को सख्त निर्देश दिए थे कि बिना शोधन के एक बूंद भी पानी यमुना में न गिरे। इसके बावजूद, नगर निगम के राठधना स्थित एसटीपी से रोजाना 20 एमएलडी दूषित पानी बिना शोधन के यमुना में जा रहा था, जिसके चलते संबंधित एसडीओ को निलंबित भी किया गया था।nnहाल ही में, 24 अक्टूबर को हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बड़ी औद्योगिक क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान, सीईटीपी के इनलेट पर पानी का स्तर कम पाया गया, जबकि गांव भोगीपुर में सीईटीपी के निकास बिंदु पर पानी का बहाव तेज था। इससे अधिकारियों को शक हुआ कि भूमिगत पाइपलाइनों के जरिए फैक्ट्रियों से आने वाले पानी को बाईपास कर बिना शोधित किए ही ड्रेन नंबर छह व आठ के माध्यम से यमुना में छोड़ा जा रहा है।nnअधिकारियों ने बड़ी औद्योगिक क्षेत्र स्थित 10 और 16 एमएलडी के सीईटीपी से तथा गांव भोगीपुर में ड्रेन छह से सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे। चार नवंबर को आई रिपोर्ट में 16 एमएलडी के सीईटीपी और भोगीपुर में ड्रेन छह से लिए गए सैंपलों में प्रदूषणकारी तत्वों की अधिकता पाई गई, जिससे यह पुष्टि हुई कि पानी को बिना शोधित किए ही यमुना में छोड़ा जा रहा है।nnबड़ी औद्योगिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे पर एचएसपीसीबी और एचएसआइआइडीसी के अधिकारियों को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि सीईटीपी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित गोयल ने बताया कि उद्योगपतियों से सीईटीपी संचालन के लिए हर महीने लगभग 70 लाख रुपये शुल्क के रूप में वसूले जाते हैं, लेकिन पानी का शोधन नहीं हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो उद्योगपति अपनी फैक्ट्रियां बंद कर दूसरे राज्यों में पलायन कर जाएंगे। उन्होंने बताया कि पहले ही पांच उद्योगपति अपनी यूनिटें बंद कर जा चुके हैं।”
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