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दिल्ली में ‘ग्रीन’ पटाखों के नाम पर ‘बारूदी’ खेल: पर्यावरण और जेब पर दोहरी मार

By Oct 22, 2025

दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की मंज़ूरी के बावजूद ‘ग्रीन पटाखों’ की आड़ में बड़े पैमाने पर अवैध और हानिकारक पटाखों की बिक्री हो रही है। जामा मस्जिद, सदर बाजार जैसे इलाकों में मुनाफाखोर साधारण पटाखों को महंगे दामों पर बेचकर ग्राहकों को लूट रहे हैं। प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण पर्यावरण को खतरा और उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति है, जिससे यह ‘बारूदी खेल’ बेरोकटोक जारी है।

दिल्ली में इस दिवाली, सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से ‘ग्रीन पटाखों’ की बिक्री तो शुरू हुई, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। राजधानी के बाज़ारों में ‘ग्रीन’ के नाम पर बड़े पैमाने पर अवैध और पर्यावरण-हानिकारक पटाखों का ‘बारूदी खेल’ चल रहा है, जिससे न सिर्फ़ प्रदूषण का ख़तरा बढ़ा है, बल्कि उपभोक्ताओं की जेब भी लूटी जा रही है।

जामा मस्जिद, पहाड़गंज, सदर बाज़ार, तेलीवाड़ा, आनंद पर्वत, खारी बावली और चांदनी चौक के भागीरथ पैलेस जैसे प्रमुख इलाकों में यह धोखाधड़ी खुलेआम देखी जा सकती है। अवैध आपूर्तिकर्ता बड़ी मात्रा में पुराने और बिना बारूद वाले पटाखों को ‘ग्रीन’ लेबल लगाकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे में अवैध पटाखों की खेप पहुंचाई जाती है और दिन में बंद रहने वाली कई दुकानें रात में चोरी-छिपे बिक्री करती हैं।

इस ‘ग्रीन’ मुखौटे के पीछे भारी मुनाफाखोरी का खेल है। जो फुलझड़ियों का पैकेट पहले 200-300 रुपये में मिलता था, वह अब 500-600 रुपये में बिक रहा है, जबकि मिर्च बम का एक पैकेट 600 रुपये तक पहुंच गया है। ग्राहक, जिन्हें असली ग्रीन पटाखों की पहचान नहीं है, नाम सुनकर ही इन्हें खरीदने को मजबूर हैं, जिससे उनकी जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है। कई ग्राहकों ने दामों में अप्रत्याशित वृद्धि पर आश्चर्य व्यक्त किया है, जबकि दुकानदार इसे ‘ग्रीन’ होने का हवाला देते हैं।

प्रशासनिक निष्क्रियता इस अवैध कारोबार को और बढ़ावा दे रही है। दिल्ली पुलिस द्वारा 168 लाइसेंस जारी किए जाने के बावजूद, इन दुकानों की सूची सार्वजनिक न होने से लोग असली ग्रीन पटाखों की तलाश में भटक रहे हैं। वहीं, बाजारों में पुलिस गश्त के बावजूद अवैध बिक्री पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। यह स्थिति न केवल पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उपभोक्ता अधिकारों का भी सीधा हनन है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

Source: Jagran

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