एक ही दिन में सपा में शामिल हुए और भाजपा की कार्यसमिति में भी मिले जगह, सिनोद शाक्य का मामला चर्चा में | uttar pradesh news
उत्तर प्रदेश की सियासत में सोमवार का दिन एक अजीब संयोग और भ्रम की स्थिति लेकर आया। बदायूं के पूर्व विधायक सिनोद कुमार शाक्य ने दिन के समय समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी में पार्टी का दामन थाम लिया था। उनके साथ कुछ अन्य नेता भी सपा में शामिल हुए थे। लेकिन जैसे ही शाम ढली, भारतीय जनता पार्टी ने अपनी उत्तर प्रदेश प्रदेश कार्यसमिति-2026 की नई सूची सार्वजनिक कर दी। इस सूची के 88वें क्रम पर सिनोद शाक्य का नाम बतौर कार्यसमिति सदस्य दर्ज पाया गया, जिसके बाद से यह राजनीतिक घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया है।
भारतीय जनता पार्टी द्वारा जारी की गई इस विस्तृत सूची में कुल 548 सदस्यों के नाम शामिल हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे दिग्गजों को स्थायी आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। ऐसे में एक ही दिन में विपक्षी दल की सदस्यता ग्रहण करने वाले नेता का नाम सत्ताधारी दल की आधिकारिक सूची में बने रहना प्रशासनिक या सांगठनिक समन्वय में चूक की ओर इशारा करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं आम जनता के बीच असमंजस की स्थिति पैदा करती हैं और दलों की आंतरिक डेटा प्रबंधन प्रणाली पर सवाल खड़े करती हैं।
सिनोद कुमार शाक्य का राजनीतिक सफर पहले से ही दल-बदल से जुड़ा रहा है। वह वर्ष 2007 और 2012 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर दातागंज विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। इसके बाद वह समाजवादी पार्टी और फिर भाजपा के रास्ते होते हुए एक बार फिर समाजवादी पार्टी में लौटे हैं। इस ताजा मामले पर फिलहाल भारतीय जनता पार्टी के किसी भी अधिकृत प्रवक्ता या पदाधिकारी की ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है कि सूची में उनका नाम किस आधार पर बरकरार है।
