बांग्लादेश में एनकाउंटर और क्रॉसफायर की वापसी के संकेत, पुलिस प्रमुख के बयान से मचा हड़कंप | bangladesh news
बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। देश के पुलिस महानिरीक्षक मो. अली हुसैन फकीर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि सरकार अनुमति देती है, तो जरूरत पड़ने पर पुलिस अपराधियों के खिलाफ ‘क्रॉसफायर’ का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेगी। ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए इस बयान के बाद से सुरक्षा तंत्र और मानवाधिकार हलकों में हलचल तेज हो गई है।
पुलिस प्रमुख ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मौजूदा हालात में सुरक्षा बलों को काम करने के लिए अनुकूल माहौल की आवश्यकता है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे पुलिस को कानून के दायरे में रहकर काम करने दें। उनके अनुसार, जब पुलिस सख्ती बरतती है तो उसे फासीवादी कहा जाता है और यदि वह संयम बरते तो उसे कमजोर मान लिया जाता है। ऐसे में संतुलन बनाना और शांति स्थापित करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
बांग्लादेश के सुरक्षा इतिहास में ‘क्रॉसफायर’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर गैर-न्यायिक हत्याओं को छिपाने के लिए किया जाता रहा है। पूर्व सरकारों के कार्यकाल के दौरान भी इस प्रकार की कार्रवाइयों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी आलोचना हुई थी। मानवाधिकार समूहों का मानना है कि इस तरह के बयानों से न्यायपालिका की भूमिका कमजोर होती है और नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर सीधा असर पड़ता है।
इस नीति के पुनरुद्धार से देश में आंतरिक सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार पुलिस प्रमुख के इस बयान पर क्या रुख अपनाती है और मानवाधिकार संगठनों के विरोध से निपटने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।
