चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा, SIR पर सभी फैसले सर्वसम्मति से लेने की बात कही | national news
वोटर लिस्ट की जांच यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच देश के चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना विस्तृत पक्ष रखा है। आयोग ने हलफनामा दाखिल कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर अकेले फैसले लेने के तमाम आरोपों को खारिज कर दिया है। इस हलफनामे के सामने आने से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चल रही बहसों पर विराम लगने की उम्मीद है, जिससे जनता के बीच लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर भरोसा मजबूत होगा।
चुनाव आयोग के मुताबिक, जून, अक्टूबर और मई के दौरान SIR को लेकर जारी किए गए तीनों महत्वपूर्ण आदेश आयोग के सभी सदस्यों की आपसी सहमति से लिए गए थे। इस हलफनामे को मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की संयुक्त मंजूरी प्राप्त है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि फाइल पर चर्चा के दौरान किसी भी अधिकारी या आयुक्त की शुरुआती टिप्पणी या सुझाव को आयोग का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता है। फाइल की पूरी प्रक्रिया के तहत ही नियमों का पालन किया जाता है।
फॉर्म 6 में किसी भी तरह के संशोधन से इंकार करते हुए आयोग ने कहा कि इस फॉर्म में बदलाव करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। हालांकि, ऑनलाइन आवेदन के दौरान इंटरफेस की वजह से जो भ्रम की स्थिति पैदा हुई थी, उसे सुधार लिया गया है। अब ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म 6 और घोषणापत्र को कागजी दस्तावेजों की तरह बिल्कुल अलग-अलग दिखाया जा रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए आयोग ने अदालत को बताया कि ऐसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जैसी बेहद जटिल होती है। फिलहाल छुट्टियों के कारण संक्षिप्त जवाब दाखिल किया गया है, और आयोग ने इस मामले में आगे विस्तृत बिंदुवार जवाब पेश करने की अनुमति भी मांगी है।
