इंडोनेशिया खरीदने जा रहा है भारत की अस्त्र मिसाइल | international news
भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक वैश्विक स्तर पर अपनी एक नई पहचान बना रही है। इसी कड़ी में, दक्षिण पूर्व एशियाई देश इंडोनेशिया ने भारतीय मिसाइल प्रणाली को अपने रक्षा बेड़े में शामिल करने में गहरी रुचि दिखाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान हुए रक्षा समझौतों की श्रृंखला में अब अस्त्र एमके-1 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल की खरीद को लेकर बातचीत अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा विकसित और भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित यह मिसाइल अपनी मारक क्षमता के लिए जानी जाती है। निर्यात संस्करण की करीब 110 किलोमीटर की रेंज इसे इंडोनेशिया द्वारा वर्तमान में इस्तेमाल की जा रही रूसी आर-77 मिसाइलों से कहीं अधिक बेहतर बनाती है। इंडोनेशियाई वायुसेना के सुखोई विमानों में इस स्वदेशी हथियार को फिट करने के लिए तकनीकी परीक्षणों का दौर जारी है, जिससे वहां के लड़ाकू विमानों की युद्धक क्षमता में उल्लेखनीय इजाफा होगा।
हालांकि, इस प्रक्रिया में रूसी मूल के पुराने रडार सिस्टम के साथ भारतीय मिसाइल के एकीकरण को लेकर कुछ तकनीकी चुनौतियां भी सामने आई हैं, जिन्हें सुलझाने के लिए दोनों देशों के इंजीनियर मिलकर काम कर रहे हैं। इस रक्षा सौदे के धरातल पर उतरने से न केवल भारत के रक्षा निर्यात को वैश्विक बाजार में मजबूती मिलेगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में कूटनीतिक समीकरण भी नए आयाम तय करेंगे। क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से इसे भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है।
