जीएसटी चोरी का पर्दाफाश: ‘स्लीपिंग मॉड्यूल’ फर्मों से अरबों का घोटाला, देशव्यापी सिंडिकेट पर शिकंजा
राज्यकर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआइबी) और पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआइटी) ने एक बड़े जीएसटी चोरी सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार केरल से लेकर दिल्ली और उत्तर प्रदेश तक फैले हुए हैं। इस देशव्यापी नेटवर्क ने फर्जी फर्मों के माध्यम से 1970 करोड़ रुपये का कागजी टर्नओवर दिखाकर सरकारी खजाने को 368 करोड़ रुपये की जीएसटी का चूना लगाया।
यह पूरा मामला 24 अक्टूबर को मुरादाबाद में स्क्रैप से लदे दो ट्रकों के पकड़े जाने के बाद सामने आया। जांच में खुलासा हुआ कि केरल और दिल्ली में बैठे मुख्य कारोबारी पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर मुरादाबाद की दर्जनों फर्जी फर्मों का इस्तेमाल कर रहे थे। इन फर्मों को विभाग ने ‘स्लीपिंग मॉड्यूल’ नाम दिया है, क्योंकि ये केवल कागजों पर सक्रिय थीं और वास्तविक रूप से कोई उत्पादन या बिक्री नहीं करती थीं। इनका एकमात्र उद्देश्य फर्जी बिलिंग के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दुरुपयोग करना था।
सिंडिकेट की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी। सबसे पहले, अलग-अलग राज्यों में किराए के पतों, फर्जी पैन कार्ड और जाली आधार दस्तावेजों का उपयोग करके कई फर्जी फर्में पंजीकृत कराई गईं। इसके बाद, ये फर्में एक-दूसरे को बिल जारी करती थीं, जिससे यह प्रतीत होता था कि वास्तविक माल का लेन-देन हो रहा है। ई-वे बिल भी तैयार किए जाते थे, लेकिन वास्तव में कोई माल या ट्रक कभी चलता ही नहीं था। इसी फर्जी बिलिंग के आधार पर आईटीसी का दावा किया जाता था और वास्तविक कर भुगतान से बचा जाता था।
जांच में पता चला है कि केरल की जीके ट्रेडर्स नामक फर्म को फर्जी लेन-देन के आधार पर 27 करोड़ रुपये की आईटीसी छूट मिली थी। यह फर्म दिल्ली की एसआर ट्रेडर्स से जुड़ी थी, जिसने मुरादाबाद मंडल की नौ सहित पूरे प्रदेश की 20 फर्मों को यह रकम ऑनलाइन ट्रांसफर की। इस प्रकार, केरल से मुरादाबाद तक एक जटिल फर्जी टैक्स क्रेडिट चैनल बनाया गया था।
एसआइबी और एसआइटी की टीमें अब सभी संदिग्ध फर्मों के बैंकिंग लेनदेन, ई-वे बिल और जीएसटी फाइलिंग की गहन जांच कर रही हैं। कई खातों को संदिग्ध लेनदेन के चलते फ्रीज कर दिया गया है। विभाग ने इस धोखाधड़ी से जुड़ी आईटी सर्विस कंपनियों और जीएसटी कंसल्टेंट्स को भी जांच के दायरे में लिया है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि इस प्रकरण में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू भी सामने आ सकते हैं, जिसके लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से समन्वय स्थापित किया जा रहा है। आने वाले दिनों में कई बड़ी गिरफ्तारियां और फर्जी फर्मों के लाइसेंस निरस्त होने की संभावना है, जिससे इस राष्ट्रीय स्तर के कर अपराध की जड़ें और गहरी उजागर होंगी।
