मेरठ नीले ड्रम हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा | crime news
मेरठ में चर्चित रहे नीले ड्रम हत्याकांड में अदालत ने बुधवार को अपना अंतिम और ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने मर्चेंट नेवी कर्मी सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी पाई गई उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी के फंदे पर लटकाने की सजा सुनाई है। इस क्रूरतापूर्ण हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जहां आपसी लालच के चलते रिश्तों का कत्ल किया गया था।
फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत की एक अहम टिप्पणी ने सभी का ध्यान खींचा। जज ने महाभारत का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ‘दंड भी धर्म है’, यानी अपराधियों को उनके कुकर्मों के लिए कठोर सजा देना न्याय का सबसे बड़ा हिस्सा है। अदालत के इस कड़े रुख से यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि जघन्य अपराधों में संलिप्त लोगों के लिए कानून में नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है। फैसले के बाद कोर्ट रूम में मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली और इसे न्याय की जीत बताया।
यह पूरा मामला 3 मार्च 2025 का है, जब मर्चेंट नेवी कर्मी सौरभ राजपूत की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। हत्या के बाद सबूत मिटाने की नीयत से आरोपियों ने शव के टुकड़े किए और उन्हें एक नीले ड्रम में डालकर पर सीमेंट से सील कर दिया था। इस सनसनीखेज वारदात के खुलासे के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए करीब 13 महीनों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान 126 सुनवाइयों में कुल 22 गवाह पेश किए। गवाहों के पुख्ता बयानों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया था।
इस क्रूर वारदात के सामने आने के बाद से ही पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा था। सौरभ के भाई और परिवार ने इस लंबी कानूनी लड़ाई में हर कदम पर संघर्ष किया। पीड़ित परिवार का कहना है कि सुनवाई के दौरान भी आरोपियों के चेहरों पर किसी प्रकार का पछतावा नहीं दिखा। इस फैसले से समाज में एक मजबूत संदेश गया है कि मानवता को शर्मसार करने वाले अपराधों का अंजाम अंततः कठोर सजा ही होता है।
