सऊदी अरब में इंटरसेप्टर मिसाइलों का गंभीर संकट, क्राउन प्रिंस ने बदली लोकेशन | international news
सऊदी अरब इस समय गंभीर सुरक्षा और सामरिक संकट के दौर से गुजर रहा है। देश के भीतर हूती विद्रोहियों के लगातार तेज होते मिसाइल और ड्रोन हमलों ने सऊदी वायु रक्षा प्रणाली की सीमाओं को उजागर कर दिया है। किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हाल ही में हुआ भीषण हमला पिछले एक दशक के सबसे घातक हमलों में शुमार है, जिसमें बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। इस स्थिति के चलते क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
बढ़ते खतरों के बीच सऊदी प्रशासन ने देश के रणनीतिक और संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा के लिए अपनी डिफेंस बैटरियों को स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है। प्रमुख तेल प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों और शाही महलों को सुरक्षित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को भी अत्यधिक सुरक्षा वाले बंकरनुमा महलों में शिफ्ट किया गया है और उनकी लोकेशन लगातार बदली जा रही है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके।
सऊदी अरब के पास पैट्रियट और थाड जैसी अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियां होने के बावजूद, देश के विशाल भौगोलिक क्षेत्रफल के कारण हर हिस्से की एक साथ रक्षा करना बेहद कठिन हो गया है। लगातार हो रहे हमलों के कारण इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक तेजी से घट रहा है, जिससे सैन्य नेतृत्व की चिंताएं बढ़ गई हैं। यह संघर्ष यमन में जारी लंबे युद्ध का परिणाम है, जहां सऊदी सेना यमन सरकार के पक्ष में सक्रिय है, जबकि हूती विद्रोहियों को क्षेत्रीय ताकतों का समर्थन प्राप्त है। इस बढ़ते तनाव का सीधा असर आम जनजीवन और देश की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ रहा है।
