जमीन पैमाइश के दौरान लेखपाल द्वारा जाति पूछने और एससी-एसटी एक्ट की धमकी का वीडियो वायरल | hardoi news
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के सदर तहसील क्षेत्र अंतर्गत सखौरा गांव में जमीन की पैमाइश के दौरान राजस्व टीम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पट्टे की जमीन के विवाद को सुलझाने पहुँची राजस्व टीम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक लेखपाल द्वारा जातिसूचक टिप्पणियां करने और एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की धमकी देने का मामला सामने आया है। इस घटना से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है और लोगों में असंतोष व्याप्त है।
पूरी घटना तब शुरू हुई जब नायब तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व टीम और पुलिस बल सखौरा गांव में अनुसूचित जाति के एक व्यक्ति को पट्टे की जमीन का कब्जा दिलाने पहुँची थी। इसी दौरान स्थानीय निवासी गौरव पांडे ने जमीन पर अपना दावा पेश करते हुए पूरी पैमाइश की मांग की। आरोप है कि विरोध करने पर लेखपाल आलोक त्रिपाठी ने युवक से उसकी और दूसरे पक्ष की जाति पूछी। जब युवक ने खुद को ब्राह्मण बताया और दूसरे पक्ष के एससी वर्ग से होने की बात सामने आई, तो कथित तौर पर उसे एससी-एसटी एक्ट में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी गई।
इस मामले के सार्वजनिक होने के बाद विभिन्न संगठनों और सोशल मीडिया यूजर्स ने प्रशासनिक अधिकारियों के ऐसे रवैये की कड़ी निंदा की है। विवाद बढ़ने के बाद हरदोई के सदर एसडीएम मयंक कुंडू ने मामले का संज्ञान लिया है। एसडीएम का कहना है कि पैमाइश के दौरान ओवरलैपिंग और लेखपाल की ओर से इस तरह की अनुचित टिप्पणी किया जाना पूरी तरह गलत है। पूरे मामले की जांच तहसीलदार सदर को सौंप दी गई है और निर्देश दिए गए हैं कि दो दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपी जाए।
जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले कर्मचारी के खिलाफ सख्त विभागीय और विधिक कार्रवाई की बात कही जा रही है। हालांकि, आरोपी लेखपाल आलोक त्रिपाठी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका दावा है कि वे केवल स्थिति को संभालने और नियमानुसार पट्टेदार को उसका हक दिलाने गए थे, और वायरल वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।
