कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की वेज लिमिट बढ़कर हुई 25,000 रुपये | india politics news
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की वेज लिमिट में बड़ा बदलाव करते हुए इसे 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है [india politics news]। करीब 12 साल बाद हुए इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य देश के लाखों कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना है। इस नीतिगत बदलाव से संगठित क्षेत्र से जुड़े 51 लाख से अधिक कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा और वे अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज के अंतर्गत आ जाएंगे।
इस नए बदलाव के लागू होने के बाद नौकरीपेशा वर्ग के मन में इन-हैंड सैलरी घटने को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। नियमों के अनुसार, जो कर्मचारी पहले 15,000 से 25,000 रुपये के वेतन दायरे के कारण अनिवार्य पीएफ से बाहर थे, वे अब इसके दायरे में आ जाएंगे। ऐसे में यदि उनके वेतन पर 12 प्रतिशत की दर से पीएफ कटौती लागू होती है, तो उनकी मासिक प्राप्त होने वाली सैलरी में मामूली कमी आ सकती है। हालांकि, यह राशि सीधे उनके भविष्य निधि खाते में जमा होगी, जो रिटायरमेंट के समय एक बड़ी बचत और बेहतर पेंशन के रूप में वापस मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन कर्मचारियों का पीएफ पहले से कट रहा है, उनकी सैलरी पर इस नई सीमा का कोई तात्कालिक नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह कदम दीर्घकालिक रूप से कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने और असंगठित से संगठित दायरे में आए लोगों को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम प्रशासनिक निर्णय है।
