पेट्रोल पंपों पर यूपीआई भुगतान को लेकर असमंजस, कैश पेमेंट के लगे पोस्टर | national business news
देशभर में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलने के बीच अब ट्रांजैक्शन शुल्कों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। आगामी पंद्रह अक्टूबर से दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर चार्ज लगाने की सुगबुगाहट के बाद व्यापारिक जगत में चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी का एक उदाहरण राजस्थान के अलवर में देखने को मिला है, जहां कई पेट्रोल पंपों पर कैश पेमेंट को प्राथमिकता देने वाले पोस्टर चस्पा कर दिए गए हैं। [national business news]
व्यापारियों और ग्राहकों में भ्रम की स्थिति
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि नए शुल्क ढांचे को लेकर अभी पूरी तरह से स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं, जिसके कारण एहतियात बरती जा रही है। दूसरी ओर, ईंधन भरवाने पहुंचने वाले आम नागरिक भी असमंजस में हैं और बड़े भुगतानों के लिए यूपीआई के बजाय नकद राशि का उपयोग करने लगे हैं। कई ग्राहक भुगतान को छोटे हिस्सों में बांटकर ट्रांसफर कर रहे हैं ताकि किसी भी अतिरिक्त प्रभार से बचा जा सके।
क्या है नियमों की असलियत
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यह प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था केवल सीमित और चुनिंदा बड़े व्यापारियों को ही प्रभावित करेगी। नब्बे प्रतिशत से अधिक छोटे व्यापारी इस दायरे से बाहर रखे गए हैं। पेट्रोल पंपों जैसे प्रतिष्ठानों के लिए फ्लैट रेट मॉडल का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत एक निश्चित सीमा से अधिक के डिजिटल भुगतान पर मामूली शुल्क तय किया गया है, ताकि खुदरा ईंधन बिक्री पर डिजिटल भुगतान का विकल्प किफायती बना रहे। इस नीतिगत बदलाव से आम जनता को पारदर्शी और सुगम व्यवस्था मिलने की उम्मीद है, बशर्ते बाजार में फैली भ्रांतियों को समय रहते दूर किया जाए।
