लखनऊ पीजीआई में टीबी जांच के लिए आधुनिक तकनीक शुरू | uttar pradesh health news
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक मजबूत करते हुए लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (पीजीआई) ने टीबी की बीमारी के खात्मे की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। संस्थान में अब अत्याधुनिक नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस) जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे राज्य के मरीजों को खासी राहत मिलने की उम्मीद है [uttar pradesh health news]। इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से अब एक ही बार की गई जांच में टीबी के जीवाणु की सटीक पहचान के साथ-साथ यह भी पता चल जाएगा कि मरीज पर कौन सी दवाएं असर करेंगी और किस दवा के प्रति बैक्टीरिया में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो चुकी है।
पारंपरिक जांच पद्धतियों में अक्सर लंबा समय लगता था और कई बार सटीक परिणाम आने में देरी होती थी, जिससे सही दवा का चयन करने में कठिनाई आती थी। लेकिन अब इस नई एनजीएस तकनीक की मदद से रिपोर्ट महज तीन से पांच दिनों के भीतर मिल जाएगी। इससे डॉक्टरों को तुरंत यह निर्णय लेने में मदद मिलेगी कि मरीज के लिए कौन सा उपचार सबसे प्रभावी रहेगा। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर सही निदान मिलने से न केवल मरीजों की रिकवरी तेज होगी, बल्कि कम समय में सटीक इलाज शुरू होने से संक्रमण के प्रसार को रोकने में भी बड़ी मदद मिलेगी।
हाल ही में संस्थान के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के अंतर्गत स्थापित बीएसएल-3 टीबी लैब में इस तकनीक को लेकर तीन दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन भी किया गया था। इस कार्यशाला में देश भर के चुनिंदा मेडिकल कॉलेजों, शोध संस्थानों और प्रयोगशालाओं से आए विशेषज्ञों को इस अत्याधुनिक मशीन के संचालन और रिपोर्टिंग की बारीकियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। संस्थान को यह उन्नत मशीन कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) सहयोग के तहत प्राप्त हुई है, जो चिकित्सा अनुसंधान और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक बड़ा सहयोग माना जा रहा है।
