लखनऊ में जैन समाज ने मनाया पर्युषण पर्व, संयम और तपस्या पर दिया जोर | lucknow news
राजधानी के ठाकुरगंज इलाके में स्थित श्वेतांबर जैन दादाबाड़ी में पर्युषण पर्व के तीसरे दिन आध्यात्मिक और धार्मिक अनुष्ठानों की धूम रही। नित्य प्रतिक्रमण और तीर्थंकर प्रभु की अष्टप्रकारी पूजा के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई, जिसमें जैन श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस प्रकार के आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने और मानसिक शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं [lucknow news]।
राजा उदयन और सेठ सुदर्शन के प्रसंग
मंदिर परिसर में आयोजित विशेष प्रवचन के दौरान साध्वी अर्चना और यशोगुणा जी महाराज ने जैन धर्म के महान प्रसंगों का वर्णन किया। उन्होंने भगवान महावीर के शासन में दीक्षा लेने वाले राजा उदयन के जीवन चरित्र और सेठ सुदर्शन के जीवन से जुड़े संस्मरणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। साध्वी जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बताया कि पर्युषण पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और तपस्या की साधना का काल है।
कषायों पर विजय और कल्पसूत्र वाचन
प्रवचन में आगे बताया गया कि क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकारों पर विजय प्राप्त करके ही जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है। क्षमा, विनय, सरलता और संतोष को जीवन में उतारना ही सच्चे अर्थों में संयम धर्म है। इस दौरान अंतिम श्रुतकेवली भद्रबाहु स्वामी द्वारा रचित प्रसिद्ध जैन ग्रंथ ‘कल्पसूत्र’ का संघ में भव्य प्रवेश कराया गया और अष्टप्रकारी पूजा संपन्न हुई। उज्जैन से पधारे चिराग जी कोठारी ने सुमधुर वाद्य यंत्रों के साथ भक्ति गीतों की प्रस्तुति देकर पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।
