मिशन कर्मयोगी के तहत दो ऑनलाइन कोर्स पूरा करना अनिवार्य, शासन ने दी कड़ी चेतावनी | up politics news
सरकारी महकमों में प्रशासनिक कसावट लाने और कामकाज की गुणवत्ता में सुधार के लिए शुरू किए गए ‘मिशन कर्मयोगी’ अभियान को लेकर राज्य सरकार ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शासन की ओर से जारी ताजा निर्देशों के मुताबिक, प्रदेश के सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए 11 सितंबर तक कम से कम दो ऑनलाइन कोर्स पूरे करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस सख्ती का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता को तेजी से बढ़ाना है [up politics news]।
मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से सभी विभागों के प्रमुखों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इस समयावधि के दौरान कर्मचारियों को प्रशिक्षण पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने का मौका दिया जाए। इसके लिए यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि प्रशिक्षण के निर्धारित दिनों में कोई अन्य विभागीय बैठकें या समीक्षा कार्यक्रम आयोजित न किए जाएं, ताकि प्रशासनिक कार्यों में किसी तरह की बाधा न आए।
उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) द्वारा हाल ही में सौंपी गई प्रगति रिपोर्ट के आधार पर यह कदम उठाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेशभर के विभिन्न विभागों में कुल 19 लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा अभी भी तय मानकों के अनुसार अपने प्रशिक्षण को पूरा नहीं कर पाया है। प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि इस अनिवार्य प्रशिक्षण से सरकारी सेवाओं के वितरण में पारदर्शिता और गति आएगी, जिसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा।
अक्टूबर 2026 में प्रस्तावित एक उच्चस्तरीय कार्यशाला को ध्यान में रखते हुए यह समयसीमा तय की गई है। सभी विभागाध्यक्षों और कार्यालयाध्यक्षों को व्यक्तिगत स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग करने को कहा गया है। कार्मिक विभाग ने इसके लिए एक निर्धारित प्रारूप भी जारी किया है, जिसके जरिए पूरा किए गए कोर्स का ब्योरा ईमेल के माध्यम से उपाम को समय पर भेजना अनिवार्य किया गया है।
