उत्तर प्रदेश में गौशालाएं होंगी आत्मनिर्भर, घायल गोवंश के लिए चलेगी 24 घंटे एंबुलेंस सेवा | up politics news
उत्तर प्रदेश में पशु संरक्षण और गोवंश की देखरेख को एक नया आयाम देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। राज्य प्रशासन ने गोवंश आश्रय स्थलों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गौशालाओं को केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर न रखकर उन्हें आत्मनिर्भरता के एक बेहतर मॉडल के रूप में विकसित करना है। (up politics news)
राजधानी लखनऊ में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में 25 सूत्रीय एजेंडे पर गहन विचार-विमर्श किया गया। योजना के तहत अब गोबर और गोमूत्र के व्यावसायिक इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। इनसे जैविक खाद और बॉयोगैस तैयार की जाएगी, साथ ही विभिन्न पंचगव्य उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय से गौशालाओं का संचालन अधिक सुगम हो सकेगा। इस कदम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
आगामी व्यवस्थाओं के तहत सड़क दुर्घटनाओं या अन्य कारणों से गंभीर रूप से घायल होने वाले गोवंश को समय पर इलाज मिलना सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए 24 घंटे काम करने वाली विशेष पशु एंबुलेंस सेवा शुरू करने का प्रस्ताव है, जो सूचना मिलते ही तुरंत मौके पर पहुंचेगी और घायल पशु को नजदीकी चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाएगी। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत पालकों को एक समय में दिए जाने वाले गोवंश की संख्या चार से बढ़ाकर दस करने का भी प्रस्ताव है, जिससे अधिक से अधिक लोग इस सेवा से जुड़ सकें।
