कानपुर नगर निगम ठेकेदारों पर सीएम की कार्रवाई: दो गिरफ्तार, सरगना फरार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद कानपुर की सरकारी मशीनरी में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने नगर निगम के दो ठेकेदारों को गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरोह का सरगना गोविंद शर्मा, जो आगरा का रहने वाला है, फिलहाल फरार है। उस पर आरोप है कि वह अपने नियंत्रण में सभी ठेकेदारों से रकम लेकर मोटा कमीशन लेता था और रसूखदार के संरक्षण में ठेके दिलवाता था।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय द्वारा कराई गई जांच के बाद नगर निगम की तरफ से पांच तहरीरें दी गई थीं, जिनके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। ये मुकदमे थाना स्वरूप नगर में दर्ज हुए हैं। एक और मुकदमा फजगंज थाने में एक ठेकेदार की तहरीर पर दर्ज किया गया है। जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। मेसर्स दिलीप बाजपेई, मेसर्स अजय इंटरप्राइजेज, मेसर्स पारसनाथ बिल्डर्स, कैला इंटरप्राइजेज, तिरुपित ट्रेडर्स और जगदंबा इंटरप्राइजेज जैसी फर्मों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है।
कैला इंटरप्राइजेज के मालिक गोविंद शर्मा की फर्म को अकेले इसी वित्तीय वर्ष में लगभग 13 करोड़ का टेंडर मिला था। पारसनाथ बिल्डर्स के मालिक संदीप जैन और जगदंबा इंटरप्राइजेज के मालिक रंजन बाजपेई को गिरफ्तार किया गया है। इन पर ठेकों का गिरोह चलाने, अन्य ठेकेदारों को एंट्री न देने और कमीशनखोरी के आरोप हैं। इस रैकेट के कारण घटिया निर्माण कार्य होने की बात सामने आई है।
इस मामले के मद्देनजर पंद्रहवें वित्त आयोग से हुए 100 करोड़ के ठेके निरस्त कर दिए गए हैं। अब सभी ठेके ई-टेंडरिंग के जरिए ही जारी और स्वीकृत किए जाएंगे। जिन ठेकों में निर्माण कार्य चल रहा है, वे जारी रहेंगे लेकिन उनकी भी जांच होगी। नए ठेकों में लॉटरी सिस्टम को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई से सरकारी ठेकों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
