आगरा युवती से दुष्कर्म और धर्मांतरण: बिहार के युवक को 10 साल की जेल, Agra court का फैसला
आगरा की एक युवती से दुष्कर्म और जबरन धर्मांतरण के गंभीर मामले में न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। बिहार के सीवान निवासी नसीब आलम को दोषी पाते हुए कोर्ट ने उसे 10 साल की कैद और 55 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इस घटना ने समाज को झकझोर कर रख दिया है, जहां एक युवक ने धोखे से युवती को फंसाया और उसके साथ अमानवीय कृत्य किए।
यह मामला फतेहाबाद क्षेत्र का है, जहां नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की मतगणना के दौरान युवती अचानक गायब हो गई थी। शुरू में परिजनों ने चुनावी रंजिश के चलते अपहरण की आशंका जताई थी और पांच लोगों को नामजद कराया था। हालांकि, पुलिस की गहन विवेचना में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पता चला कि युवती हेया ऐप का इस्तेमाल करती थी, जिसके जरिए उसकी दोस्ती नसीब आलम से हुई थी।
पुलिस ने सर्विलांस टीम की मदद से युवती को बिहार के सीवान जिले से सकुशल बरामद किया। इस दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि जिन पांच लोगों को नामजद किया गया था, वे निर्दोष थे और उनके नाम मुकदमे से निकाल दिए गए। पुलिस ने नसीब आलम के खिलाफ अपहरण, बंधक बनाकर दुष्कर्म और जबरन धर्मांतरण के आरोप में चार्जशीट दाखिल की। साथ ही, निकाह कराने वाले मौलवी मोहम्मद आमीन के खिलाफ भी आरोप पत्र दायर किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता ने कोर्ट में गवाही दी। उसने बताया कि नसीब आलम से उसकी दोस्ती ऐप के जरिए हुई थी। 13 मई 2023 को नसीब उसे फतेहाबाद से ले गया था। पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने उसे कुछ पिलाया जिससे वह अर्ध-बेहोश हो गई। इसके बाद, नसीब ने उसका जबरन धर्मांतरण कराकर ‘नसीबा’ नाम रखा और निकाह कर दुष्कर्म किया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि उसे जबरन बीयर और नशे की गोलियां दी जाती थीं।
न्यायाधीश प्रदीप कुमार ने पीड़िता के बयानों और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नत्थू सिंह धाकरे के तर्कों को सुनने के बाद नसीब आलम को दोषी ठहराया। वहीं, निकाह कराने के आरोपी मौलवी मोहम्मद आमीन को पर्याप्त सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। इस फैसले से पीड़ित को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है और यह ऐसे अपराधों के खिलाफ एक सख्त संदेश है।
