भारत को उपभोक्ता से उत्पादक बनने की जरूरत: प्रो. मित्तल
भारत अब शोध और नवाचार के क्षेत्र में निवेश बढ़ा रहा है। देश सूचना प्रौद्योगिकी का एक बड़ा उपभोक्ता है, लेकिन अब समय आ गया है कि हम उपभोक्ता से उत्पादक की भूमिका में आएं। शोधकर्ताओं को ऐसे उत्पाद और तकनीकें विकसित करनी चाहिए जो वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाएं और रोजगार के नए अवसर पैदा करें। ये महत्वपूर्ण बातें बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) के संरक्षण में रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल की ओर से ‘प्रोटोटाइप डेवलपमेंट एंड वेलिडेशन क्लीनिक’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में कहीं। उन्होंने शोध को केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उसे व्यावहारिक समाधानों में बदलने पर विशेष बल दिया।
नवाचार संस्कृति को मजबूत करने के लक्ष्य के साथ, आईआईसी के अध्यक्ष प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने सुझाव दिया कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल और नवकल्पा को समन्वित प्रयास करने चाहिए ताकि शोध परिणामों को प्रोटोटाइप और उपयोगी तकनीकों में बदला जा सके। एनबीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. पंकज कुमार श्रीवास्तव ने तकनीकी विचारों को कार्यशील मॉडल में बदलने की बारीकियां समझाईं। उन्होंने कहा कि किसी भी विचार को सफल बनाने के लिए उसका वैज्ञानिक, इंजीनियरिंग और व्यावहारिक अनुप्रयोग के स्तर पर सफल होना अनिवार्य है। इस कार्यशाला का उद्देश्य देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नवाचार को बढ़ावा देना है, जिससे भविष्य में भारत वैश्विक प्रौद्योगिकी बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी बन सके।
