फर्जी डॉक्टर रैकेट का खुलासा: 41 पर एक्शन, 23 जिलों में FIR का आदेश, UP में बड़ा स्कैम
आयुष विभाग में फर्जी दस्तावेजों के सहारे डॉक्टर बनने वालों के खिलाफ अब सख्ती बरती जा रही है। बोर्ड ने 23 जिलों में ऐसे सभी मामलों में मुकदमा दर्ज कराने का आदेश जारी किया है। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारियों को पत्र भेजकर जल्द एफआईआर दर्ज कर उसकी कॉपी बोर्ड को भेजने को कहा गया है। यह कार्रवाई बिना नीट परीक्षा पास किए फर्जी रजिस्ट्रेशन कराने के खुलासे के बाद तेज हुई है।
बोर्ड के दस्तावेजों के अनुसार, यह फर्जीवाड़ा करने वाले आरोपी 23 जिलों से जुड़े हैं। इन सभी जिलों को तीन दिन के भीतर एफआईआर दर्ज कर कॉपी बोर्ड को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। यह निर्देश स्पीड पोस्ट और ईमेल दोनों माध्यमों से भेजे गए हैं ताकि कोई देरी का बहाना न बना सके।
आयुर्वेदिक और यूनानी तिब्बती चिकित्सा पद्धति बोर्ड के निवर्तमान उपाध्यक्ष डॉ. शैलेश कुमार राय के अनुसार, पिछले साल अप्रैल में पांच फर्जी रजिस्ट्रेशन की शिकायत पर एनसीआईएसएम की टीम यूपी आई थी। जांच में 41 फर्जी रजिस्ट्रेशन पाए गए। डॉ. राय ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है और कहा है कि जिलों में एफआईआर होने से पूरे गिरोह का पर्दाफाश नहीं हो पाएगा, क्योंकि इसमें यूपी के अलावा राजस्थान और मध्य प्रदेश के गिरोह भी शामिल हैं।
यह फर्जीवाड़ा गोंडा, रामपुर, कासगंज, प्रतापगढ़, कुशीनगर, बरेली, लखीमपुर खीरी, संतकबीर नगर, श्रावस्ती, मुरादाबाद, सुल्तानपुर, झांसी, संत रविदास नगर, रायबरेली, महाराजगंज, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, सीतापुर, मेरठ, सहारनपुर, अयोध्या, जौनपुर और अमरोहा जैसे जिलों में फैला हुआ है। इस मामले में जनता को सबसे ज्यादा चिंता यह है कि ऐसे फर्जी डॉक्टर मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर सकते हैं, जिससे आम लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
