राजस्थान में फर्जी डिग्री से चल रहा था मरीजों का इलाज, आठवीं पास निकला फर्जी डॉक्टर | rajasthan fake doctor
राजस्थान में स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां फर्जी डिग्रियों के सहारे मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा था। राज्य के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो ऐसे फर्जी डॉक्टरों को दबोचा है, जिन्होंने कूटसाधित दस्तावेजों के बल पर मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण करवा रखा था। इस खुलासे से आम जनमानस की सुरक्षा पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है कि कैसे झोलाछाप और फर्जी डिग्रियां धारक लोगों के स्वास्थ्य के साथ खेल रहे थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सीकर निवासी पंकज यादव और जालोर के रानीवाड़ा निवासी नानजीराम चौधरी के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया कि पंकज ने विदेश से पढ़ाई के दौरान परीक्षा पास न कर पाने पर बिहार के एक मेडिकल कॉलेज के नाम से फर्जी एमबीबीएस डिग्री और अंकतालिका तैयार करवाई थी। वहीं, दूसरे मामले में हद तब पार हो गई जब आठवीं पास नानजीराम चौधरी फर्जी दस्तावेजों के सहारे अस्पताल का मालिक बन बैठा। नानजीराम ने शुरुआती जीवन में क्लीनिक पर पर्चियां काटने और कपड़े की दुकान पर काम किया था, लेकिन बाद में उसने फर्जी डिग्रियों के बल पर अस्पताल का संचालन शुरू कर दिया।
इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश राजस्थान मेडिकल काउंसिल की रिपोर्ट और उसके बाद एसओजी द्वारा की गई गहन पड़ताल के बाद हुआ। अधिकारियों ने संबंधित विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से जब दस्तावेजों का सत्यापन कराया, तो वे पूरी तरह फर्जी पाए गए। इस घटना के बाद से आम जनता में भारी रोष है और स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी करने वाली संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
फिलहाल, एसओजी दोनों आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है और इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। यह मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि किस प्रकार प्रशासनिक चूक का फायदा उठाकर शातिर लोग आम जनता की जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं। भविष्य में इस तरह के मामलों को रोकने के लिए मेडिकल काउंसिलों को अपने सत्यापन तंत्र को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
