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आगरा में एनालॉग पनीर का काला कारोबार: 70% सैंपल फेल, ऐसे करें pure पनीर की पहचान

By Aug 9, 2026

आगरा में एनालॉग पनीर का कारोबार सालाना 10 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसकी दैनिक खपत 150 क्विंटल है। खाद्य सुरक्षा विभाग के 70% नमूने फेल हुए हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। यह पनीर प्रोटीन के बजाय फैट से भरपूर होता है और सोयाबीन या पाम ऑयल जैसे तत्वों से बनाया जाता है।

एनालॉग पनीर की बिक्री पर महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही रोक लगा दी है, लेकिन आगरा में इसका कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। यहां हर दिन 150 क्विंटल पनीर की खपत होती है, जिसमें से 70% नमूने जांच में फेल पाए गए हैं। इन मामलों में एडीएम सिटी कोर्ट में वाद विचाराधीन हैं।

आगरा सहित प्रदेश के अन्य जिलों में भी फुटकर एनालॉग पनीर की बिक्री पर रोक है। केवल पैकेटबंद पनीर ही बेचा जा सकता है, जिस पर सामग्री का स्पष्ट उल्लेख होना अनिवार्य है। इसके बावजूद, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की ढीली कार्यशैली के कारण एनालॉग पनीर का कारोबार फल-फूल रहा है। यह पनीर मुख्य रूप से राजखेड़ा, धौलपुर, बसेड़ी (राजस्थान) और मुरैना (मध्य प्रदेश) से आता है, जबकि कुछ मात्रा फतेहाबाद, बाह, पिनाहट, फतेहपुर सीकरी आदि स्थानीय क्षेत्रों में भी तैयार होती है।

एफएसडीए के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में 100 क्विंटल एनालॉग पनीर जब्त किया गया है। यह पनीर रात 11 बजे से सुबह 7 बजे के बीच गाड़ियों द्वारा सीधे डेरी या थोक विक्रेताओं तक पहुंचाया जाता है। यह 210 से 230 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिकता है और इसकी मुख्य खपत गेस्ट हाउस, ढाबों, छोटे रेस्टोरेंट और लगभग 1500 ठेल विक्रेताओं द्वारा की जाती है।

पिछले एक साल में एफएसडीए ने पनीर के 250 नमूने लिए, जिनमें से 200 एनालॉग पनीर के थे। इनमें से 70% नमूने फेल पाए गए, जिनमें दूध का अंश नहीं मिला। नमूनों में पाम ऑयल, वनस्पति, स्टार्च और सोया प्रोटीन जैसे तत्व पाए गए। इसके चलते 100 क्विंटल पनीर को नष्ट कराया गया।

सहायक आयुक्त खाद्य महेंद्र प्रताप ने स्वीकार किया है कि एनालॉग पनीर की बिक्री में वृद्धि हुई है और छापेमारी में इसके स्पष्ट संकेत मिले हैं। उन्होंने बताया कि नमूनों की जांच गति बढ़ा दी गई है और ऐसे पनीर को जब्त कर नष्ट किया जाता है। एनालॉग पनीर में दूध का अंश न के बराबर होता है और फैट की मात्रा प्रोटीन से कहीं अधिक होती है, जो इसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बनाती है।

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