यूपी के जंगलों में ‘कटरुआ’ मशरूम की तस्करी, 1500 रुपये किलो तक पहुंची कीमत
उत्तर प्रदेश के दुधवा और पीलीभीत के जंगलों में इन दिनों एक दुर्लभ मशरूम प्रजाति, जिसे ‘कटरुआ’ के नाम से जाना जाता है, की अवैध निकासी और तस्करी का मामला सामने आया है। यह मशरूम प्रोटीन से भरपूर होने के कारण शाकाहारियों के बीच ‘शाकाहारियों का मटन’ कहलाता है और इसकी कीमत बाजार में 1500 से 1600 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
वन विभाग की चिंता बढ़ी
बरसात शुरू होते ही दीमक की बांबियों पर उगने वाला यह मशरूम स्थानीय लोगों के लिए कमाई का जरिया बन गया है। ऊंची कीमत के लालच में लोग बाघों और अन्य जंगली जानवरों के इलाकों में घुसकर इसे निकालने लगे हैं। इससे न केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ रहा है, बल्कि यह मशरूम चीतल, भालू और बंदर जैसे कई वन्यजीवों का प्राकृतिक भोजन भी है। यदि इसकी अंधाधुंध निकासी जारी रही तो वन्यजीवों के भोजन पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
वन विभाग की कार्रवाई
दुधवा टाइगर रिजर्व के निदेशक एच राजा मोहन के अनुसार, कटरुआ की अवैध निकासी जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा रही है। इसे रोकने के लिए जंगलों और मंडियों में छापेमारी की जा रही है और अब तक चार लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जंगलों से कटरुआ की अवैध निकासी और खरीद-बिक्री से बचें।
स्वास्थ्य लाभ और मांग
कटरुआ मशरूम एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार है। इसमें वसा और कैलोरी कम होती है, जबकि प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है। यह बीपी, डायबिटीज और हृदय संबंधी बीमारियों में भी फायदेमंद मानी जाती है। यही कारण है कि हर साल मानसून में इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है।
