वैज्ञानिक राहुल सिंह की मौत: 62 लाख के लेनदेन और विवाद की जड़ों को खंगाल रही पुलिस
लखनऊ के गोमतीनगर स्थित होटल नोवॉटेल में युवा वैज्ञानिक और ड्रोन विशेषज्ञ राहुल सिंह की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने तफ्तीश के तार सुलझाने शुरू कर दिए हैं। विभूतिखंड पुलिस इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि राहुल सिंह और नोएडा के उद्योगपति चंद्र भूषण मिश्र के बीच 62 लाख रुपये के लेनदेन और उपजे विवाद की असल वजह क्या थी।
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, राहुल और चंद्र भूषण की पहली मुलाकात दिल्ली में एक प्रदर्शनी के दौरान हुई थी, जिसके बाद उनके बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। राहुल के भाई रोहित ने बुधवार को चंद्र भूषण मिश्र, एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी और तीन अन्य लोगों पर मानसिक प्रताड़ना और धमकी देने का आरोप लगाते हुए मौत का जिम्मेदार ठहराया था। विभूतिखंड पुलिस ने बस्ती नगर थाने में दर्ज धोखाधड़ी के मुकदमे से जुड़ी जानकारी और केस डायरी भी मंगवाई है।
जांच के तहत, पुलिस पिछले कुछ महीनों की कॉल डिटेल्स, व्हाट्सएप चैट, ऑनलाइन और बैंक खातों के लेनदेन का बारीकी से अध्ययन कर रही है। साथ ही, राहुल सिंह के एसबीआई खाते के ट्रांजेक्शन की भी जानकारी मांगी गई है, ताकि यह पता चल सके कि उनके खाते में कब और कितनी धनराशि आई। इन सभी जानकारियों को जुटाकर पुलिस अपनी जांच को आगे बढ़ाएगी।
मूल रूप से महाराजगंज के रहने वाले राहुल सिंह, गोरखपुर स्थित मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में युवा वैज्ञानिक के तौर पर कार्यरत थे। सोमवार को लखनऊ आने के बाद वह होटल नोवॉटेल में रुके थे, जहां मंगलवार को उनका शव बरामद हुआ था। गुरुवार को महाराजगंज स्थित पैतृक आवास पर गमगीन माहौल में उनका अंतिम संस्कार किया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आगे की जांच
राहुल सिंह की मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। पोस्टमार्टम में हार्ट और विसरा को सुरक्षित रखा गया है। शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले, लेकिन हृदय की प्रमुख नसों में खून का थक्का मिलने की बात सामने आई है। एसीपी विभूतिखंड सौम्या पांडेय ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर विशेषज्ञों की राय ली जा रही है और विसरा रिपोर्ट का इंतजार है।
उद्योगपति का पक्ष
वहीं, नोएडा के उद्योगपति चंद्रभूषण मिश्रा ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली की प्रदर्शनी में राहुल ने खुद को केंद्र सरकार का ड्रोन इनोवेटर बताकर विश्वास जीता था। राहुल ने एक समिट में ड्रोन के प्रदर्शन के लिए 62 लाख रुपये की तत्काल आवश्यकता बताई और एक महीने में लौटाने का वादा किया था। रुपये वापस मांगने पर राहुल मुकर गया और धमकी देने लगा, जिसके बाद 13 जून को बस्ती नगर थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया था।
एसीपी सौम्या पांडेय ने कहा कि राहुल के भाई द्वारा दी गई तहरीर की स्पष्टता पर परिवारजनों से बात की जाएगी। आरोपों की जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट व साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना का सार्वजनिक जीवन पर गहरा असर पड़ सकता है, क्योंकि यह एक युवा वैज्ञानिक की रहस्यमय मौत से जुड़ा मामला है, जो भविष्य में ऐसे विवादों की जांच के लिए एक मिसाल बन सकता है।
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