बलरामपुर में बांस का पुल: 20 हजार लोगों की जान दांव पर, पक्के ब्रिज का इंतजार
बलरामपुर के तुलसीपुर तहसील क्षेत्र में अमरहवा गांव के पास खरझार पहाड़ी नाले पर पक्के पुल का निर्माण न होने से करीब 20 गांवों की लगभग 20 हजार आबादी हर मानसून में मुश्किलों का सामना करती है। आजादी के दशकों बाद भी, ग्रामीण बांस के अस्थायी पुल के सहारे जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं। बरसात में नाला उफान पर आने से इन गांवों का संपर्क तहसील और जिला मुख्यालय से कट जाता है।
प्रशासनिक मदद के अभाव में, ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर बांस और बल्लियों से एक जुगाड़ू पुल बनाया है, जो बच्चों की शिक्षा, किसानों की आवाजाही और मरीजों को अस्पताल ले जाने का एकमात्र साधन है। यह पुल इतना जर्जर है कि इसे पार करते समय हर कदम पर हादसे का डर बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में गांव टापू बन जाते हैं और आपात स्थिति में मरीजों को चारपाई पर लादकर नाला पार कराना पड़ता है।
तुलसीपुर तहसील के पुरैछोटन, तिवारीडीह, बड़का अमरहवा, खरझार सहित करीब 20 गांव इस पुल की समस्या से प्रभावित हैं। ग्राम प्रधान ग्वोधर ने बताया कि पक्के पुल और संपर्क मार्ग निर्माण की मांग कई वर्षों से की जा रही है, लेकिन केवल आश्वासन ही मिले हैं। विधायक कैलाश नाथ शुक्ल ने कहा कि पुल निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है और इसे प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। इस पुल के अभाव में हजारों लोगों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, और कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
