35 साल पुराने आर्म्स एक्ट केस में कैबिनेट मंत्री राकेश सचान बरी, मिली बड़ी राहत
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान को 35 साल पुराने आर्म्स एक्ट के एक मामले में बड़ी राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश एमपी/एमएलए कोर्ट विजय कुमार गुप्ता ने उनकी अपील पर सुनवाई करते हुए उन्हें दोषमुक्त करार दिया है। यह मामला 13 अगस्त 1991 का है, जब नौबस्ता थाने में तत्कालीन एसओ बृजमोहन उदेनिया ने राकेश सचान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन पर आरोप था कि उनके पास से एक राइफल और नौ कारतूस बरामद हुए थे, जिनका वह लाइसेंस नहीं दिखा सके थे।
इस मामले में दिनेश चंद्र सचान और विनोद वर्मा भी आरोपी थे, जिनका फैसला पहले ही हो चुका था। जनप्रतिनिधि होने के नाते राकेश सचान की फाइल एमपी/एमएलए कोर्ट भेजी गई थी। आठ अगस्त 2022 को निचली अदालत ने उन्हें एक साल की कैद और 1500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
हालांकि, इसी आदेश के खिलाफ राकेश सचान ने अपील दाखिल की थी। अधिवक्ता गिरीश नारायण दुबे के अनुसार, न्यायालय ने माना कि निचली अदालत ने सबूतों को परखने में गलती की है। इसी आधार पर सजा को निरस्त करते हुए उन्हें बरी कर दिया गया। कोर्ट ने उन्हें 25-25 हजार रुपये की दो जमानतें और एक निजी बंधपत्र सात दिनों के भीतर दाखिल करने का आदेश दिया है।
यह मामला तब भी चर्चा में आया था जब छह अगस्त 2022 को दोषी करार दिए जाने के बाद राकेश सचान सजा सुनाए जाने से पहले ही कोर्ट से चले गए थे। वकीलों के हंगामे के बीच आदेश भी कथित तौर पर गायब हो गया था, जिसके बाद उन पर कोर्ट का आदेश ले जाने का आरोप लगा था और एफआईआर की नौबत आ गई थी। आठ अगस्त 2022 को उन्होंने कोर्ट में समर्पण किया था, जिसके बाद आदेश का पुनर्गठन कर सजा सुनाई गई थी। अब इस फैसले से मंत्री को बड़ी कानूनी राहत मिली है, जो उनके राजनीतिक करियर के लिए महत्वपूर्ण है।
