UP शिक्षक तबादला: सरप्लस बताकर गलत ट्रांसफर पर राजकीय शिक्षक संघ का विरोध तेज
उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों को सरप्लस बताकर किए जा रहे गलत तबादलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। राजकीय शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेश ने इस मामले में माध्यमिक शिक्षा विभाग से तुरंत हस्तक्षेप करने और स्थानांतरण आदेशों को निरस्त करने की मांग की है। संघ का कहना है कि शिक्षकों के पर्याप्त स्वीकृत पद और छात्र संख्या होने के बावजूद उन्हें सरप्लस घोषित कर दिया गया है।
संघ के प्रांतीय अध्यक्ष सत्य शंकर मिश्रा और प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पांडये ने बताया कि स्थानांतरण नीति 2017 की व्याख्या में गंभीर त्रुटियां की गई हैं। कई ऐसे विद्यालयों में शिक्षकों को भेजा जा रहा है, जहां न तो उस विषय के छात्र हैं और न ही उस विषय का स्वीकृत पद है। उदाहरण के तौर पर, प्रयागराज के राजकीय इंटर कॉलेज में वाणिज्य के दो स्वीकृत पदों और पर्याप्त छात्र संख्या के बावजूद एक शिक्षक का तबादला कर दिया गया। वहीं, इसी शहर के एक अन्य जीआईसी में सामाजिक विज्ञान के 16 पदों पर 13 शिक्षक कार्यरत होने के बावजूद कुछ को सरप्लस बताकर तबादला किया गया। लखनऊ के राजकीय सैनिक इंटर कॉलेज में इतिहास के प्रवक्ता को शून्य छात्र संख्या के कारण हटाया गया, लेकिन उन्हें जिस स्कूल में भेजा गया, वहां भी इस विषय के छात्र शून्य हैं।
संघ ने स्थानांतरण आदेशों में अवकाश न देने और भत्ता न देने के प्रावधानों को भी असंवैधानिक करार दिया है। शिक्षकों के इन तबादलों से शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि योग्य शिक्षकों को अनुपयुक्त स्थानों पर भेजा जा रहा है, जिससे छात्रों की पढ़ाई बाधित हो सकती है।
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