कानपुर भाजपा पार्षदों की लड़ाई पर पार्टी की आपत्ति, ‘व्यक्तिगत झगड़ा’ बताया
कानपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पार्षदों के बीच बुधवार को हुए आंतरिक घमासान और आरोप-प्रत्यारोप पर पार्टी ने सख्त नाराजगी जाहिर की है। जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने स्पष्ट किया कि पार्षदों के जिस गुट ने सामूहिक इस्तीफे की पेशकश की है, उनका तरीका पूरी तरह गलत था। उन्होंने कहा कि इस तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस्तीफा देने की घोषणा करना अनुचित है। ऐसे मुद्दों को संगठन के मंच पर लाकर लिखित शिकायत या सीधी वार्ता के माध्यम से सुलझाना चाहिए था।
जिलाध्यक्ष ने यह भी बताया कि प्रभारी मंत्री के साथ हुई बैठक में लिए गए निर्णयों का आज तक पालन नहीं हुआ है, जिसके कारण यह आपसी लड़ाई फिर से शुरू हो गई है। उन्होंने दोनों गुटों की इस लड़ाई को व्यक्तिगत करार दिया। दीक्षित के अनुसार, “काफी दिन से इनका विवाद चल रहा है। हमने अपने स्तर से बैठाकर समझाया, फिर प्रभारी मंत्री के सामने बैठाकर समझाया गया। अब सारा मामला क्षेत्र और प्रदेश नेतृत्व को हमने दे दिया है। इसमें पार्टी की कोई लड़ाई नहीं लगती, यह उनकी निजी लड़ाई है।” छह पार्षदों का कहना है कि उन्हें पंद्रहवें वित्त आयोग के मद से विकास कार्य का पैसा नहीं मिल रहा है और उन्हें काम नहीं मिल रहा है।
भाजपा पार्षद दल के नेता नवीन पंडित की अगुवाई में 75 पार्षदों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बागी छह पार्षदों के खिलाफ मोर्चा खोला था, जिसमें व्यक्तिगत कटाक्ष भी किए गए थे। नवीन पंडित ने चेतावनी दी थी कि यदि संगठन बागियों पर कार्रवाई नहीं करता है, तो वे सभी सामूहिक इस्तीफा दे देंगे। इसके जवाब में, शाम को बागी पार्षदों ने भी पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वे संगठन के निर्देशों पर काम करते रहेंगे, लेकिन पार्टी हितों के खिलाफ काम करने वालों को नहीं छोड़ेंगे और महापौर व उनके बेटे की गतिविधियों को उजागर करते रहेंगे। यह विवाद शहर के विकास कार्यों और पार्षदों के बीच सत्ता संघर्ष को दर्शाता है, जिसका सीधा असर आम जनता के विकास कार्यों पर पड़ सकता है।
