दुबई की नौकरी छोड़कर स्ट्रॉबेरी फार्मिंग से बदली किस्मत, किसान नवीन की कहानी
सीतापुर के हरगांव ब्लॉक के पिथौरा गांव के नवीन राजवंशी ने दुबई की नौकरी छोड़कर खेती में अपनी तकदीर लिखी है। उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती को अपनाकर न सिर्फ अपनी जिंदगी बदली, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बने हैं। नवीन की यह कहानी दिखाती है कि सही सोच और मेहनत से गांव की जमीन पर भी बड़ी सफलता पाई जा सकती है।
कोरोना महामारी के दौरान दुबई से लौटे नवीन ने विदेश वापस न जाने का फैसला किया। इसी दौरान उन्हें इंटरनेट से स्ट्रॉबेरी की खेती का विचार आया। उन्होंने जिला उद्यान विभाग और कृषि विशेषज्ञों की मदद से करीब चार बीघा जमीन पर यह फसल उगाने का निर्णय लिया। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहां गेहूं और धान की मुख्य फसलें हैं, वहां स्ट्रॉबेरी उगाना एक बड़ी चुनौती थी, खासकर अच्छी गुणवत्ता वाली पौध की कमी एक बड़ी समस्या थी।
कृषि विज्ञान केंद्र कटिया के वैज्ञानिक डॉ. दया शंकर श्रीवास्तव ने नवीन के मार्गदर्शक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सलाह पर नवीन ने महाराष्ट्र के महाबलेश्वर से उच्च गुणवत्ता वाली स्ट्रॉबेरी की पौध मंगवाई। नई तकनीक और अनजानी जमीन पर खेती शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन नवीन ने हार नहीं मानी। लगातार मेहनत और वैज्ञानिकों के सहयोग से उन्होंने हर बाधा को पार किया।
आज नवीन राजवंशी चार बीघा जमीन पर स्ट्रॉबेरी उगाकर सालाना चार से साढ़े चार लाख रुपये कमा रहे हैं। उनकी स्ट्रॉबेरी की मांग सीतापुर के अलावा लखीमपुर जैसे जिलों में भी है। ताजी और अच्छी गुणवत्ता के कारण उन्हें बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं, जिससे विपणन की चिंता कम हो जाती है। नवीन की यह सफलता उन युवा किसानों के लिए एक मिसाल है जो परंपरागत खेती से हटकर कुछ नया करना चाहते हैं।
