स्क्रीन टाइम से बच्चों की एकाग्रता पर असर, योग से समाधान संभव: विशेषज्ञ
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कानपुर के राजकीय बालगृह में एक विशेष योग एवं स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य बालगृह में रहने वाले किशोरों को योग, आयुर्वेद और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में जागरूक करना था, ताकि उनके शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को बढ़ावा मिल सके। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक परंपराओं के अनुसार स्वर्णप्राशन संस्कार से हुई।
शिविर की अध्यक्षता करते हुए डॉ. नीरजा दुबे ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन को संतुलित, अनुशासित और सकारात्मक बनाने की एक वैज्ञानिक जीवन-पद्धति है। वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक ने चिंता व्यक्त की कि आजकल बच्चे और किशोर अत्यधिक तनाव से गुजर रहे हैं, जिसका एक प्रमुख कारण मोबाइल और अन्य स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग है। उन्होंने बताया कि इस स्क्रीन टाइम की अधिकता के कारण बच्चों की एकाग्रता में भी भारी कमी आ रही है। डॉ. पाठक के अनुसार, योग के माध्यम से इस समस्या का प्रभावी समाधान संभव है।
इस अवसर पर डॉ. रामकिशोर ने उपस्थित प्रतिभागियों को ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, वृक्षासन, नटराजासन, उद्धान मंडूकासन और शशांकासन जैसे विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया। इस तरह के आयोजन बच्चों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे उन्हें स्वस्थ आदतों और मानसिक शांति की ओर प्रेरित करते हैं।
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