आगरा नगर निगम की शर्मनाक हरकत: शिकायतकर्ता को ‘मानसिक विक्षिप्त’ बताकर केस बंद, मानवाधिकार आयोग ने दिए जांच के आदेश
आगरा के जगदीशपुरा थाना क्षेत्र के भीम नगर निवासी विशेष राठौर ने अपने इलाके में फैले जलभराव और गंदगी की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई थी। उनकी उम्मीद थी कि अधिकारी मौके पर आकर समस्या का समाधान करेंगे, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों ने समस्या को छिपाने के लिए एक नया तरीका अपनाया। तत्कालीन जांच अधिकारी राघवेंद्र यादव ने अपनी रिपोर्ट में शिकायतकर्ता को ‘कुछ मानसिक विक्षिप्त’ बताया और इसी आधार पर शिकायत को निस्तारित कर दिया गया।
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव वर्मा ने भी इस अपमानजनक आख्या पर मुहर लगा दी, जिससे सरकारी रिकॉर्ड में एक जागरूक नागरिक को मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित कर दिया गया। इस प्रशासनिक क्रूरता और अपमान से आहत होकर विशेष राठौर ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने आयोग को बताया कि कैसे अधिकारियों ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए उनके मौलिक अधिकारों का हनन किया है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को व्यक्तिगत प्रतिष्ठा के उल्लंघन का गंभीर मामला मानते हुए जिलाधिकारी को नोटिस जारी किया है। आयोग ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने और चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह घटना सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता और आम नागरिक की आवाज को दबाने के प्रयासों को उजागर करती है।
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