ईरान-अमेरिका युद्धविराम से कच्चा तेल 15% सस्ता, भारत को मिलेगी महंगाई से राहत
ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम के ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। बुधवार को क्रूड ऑयल की कीमत करीब 15 डॉलर घटकर 94.27 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई। यह पिछले 6 सालों में एक दिन में हुई सबसे बड़ी गिरावट है। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चा तेल 73 डॉलर प्रति बैरल था, जो युद्ध के दौरान बढ़कर 120 डॉलर तक पहुंच गया था। इस गिरावट से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंकाएं फिलहाल खत्म हो गई हैं।
युद्धविराम से वैश्विक बाजारों में तेजी
युद्ध थमने की खबरों से वैश्विक शेयर बाजारों में तेजी देखी गई है। अमेरिका के S&P 500 फ्यूचर्स 2% और यूरोपीय बाजार 5% तक चढ़े। भारत के सेंसेक्स और निफ्टी में भी करीब 4% की बढ़ोतरी हुई। निवेशकों का भरोसा बढ़ने से भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ है। शुरुआती कारोबार में रुपया 41 पैसे मजबूत होकर 92.55 पर पहुंच गया।
आगे की अनिश्चितता
हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि यह राहत अस्थायी हो सकती है। यदि दो सप्ताह में पूर्ण समझौता नहीं हुआ, तो तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर के पार जा सकती हैं।
कच्चा तेल सस्ता होने से भारत को फायदे
भारत अपनी 85% तेल की जरूरतें आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से अर्थव्यवस्था को कई मोर्चों पर लाभ होता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहेंगी, जिससे परिवहन लागत कम होगी और आम आदमी को राहत मिलेगी। रोजमर्रा के सामानों की कीमतों पर भी महंगाई का दबाव कम होगा। इसके अतिरिक्त, आयात बिल घटने से चालू खाता घाटा (CAD) में सुधार होगा और रुपये को मजबूती मिलेगी। सरकार के सब्सिडी बोझ में भी कमी आएगी, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए अधिक धन उपलब्ध होगा। एक्सपर्ट्स के अनुसार, कच्चे तेल में 10 डॉलर की गिरावट से CAD में 9-10 बिलियन डॉलर की कमी आ सकती है।
