90 दिन वेंटिलेटर पर जंग लड़कर लौटा किशोर, Lucknow news में डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी
लखनऊ के लोहिया संस्थान में भर्ती 13 वर्षीय वैभव जायसवाल ने मौत को मात देकर नई जिंदगी हासिल की है। मिर्जापुर निवासी वैभव को गंभीर अस्थमा और छाती के संक्रमण के कारण बेहद नाजुक हालत में संस्थान के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। उसकी स्थिति इतनी गंभीर थी कि उसे 90 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। डॉक्टरों की अटूट मेहनत और परिवार की दुआओं ने आखिरकार वैभव को जीवनदान दिया।
वैभव पहले से ही अस्थमा का मरीज था, लेकिन छाती के गंभीर संक्रमण ने उसकी सांसों को पूरी तरह रोक दिया था। वेंटिलेटर के बिना सांस लेना असंभव था। डॉक्टरों के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि मरीज की उम्र कम थी और संक्रमण गंभीर था।
लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने इस चुनौती को एक मिशन के रूप में लिया। एनस्थीसिया विभाग के अध्यक्ष डॉ. पीके दास ने बताया कि वैभव की स्थिति में सुधार की गति बहुत धीमी थी। कई बार ऑक्सीजन का स्तर गिरा और संक्रमण का खतरा बढ़ा। डॉक्टरों ने हार नहीं मानी और बेड पर ही ब्रोंकोस्कोपी समेत कई महत्वपूर्ण जांचें कीं।
तीन महीने तक अस्पताल में रहने के बाद, वैभव ने धीरे-धीरे खुद से सांस लेना शुरू किया। वेंटिलेटर से हटाए जाने के बाद उसकी रिकवरी तेजी से हुई। डॉक्टरों ने बताया कि वैभव अब खतरे से बाहर है और पूरी तरह ठीक हो चुका है। परिवार के लिए यह किसी पुनर्जन्म से कम नहीं था।
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