टारगेटेड एनेस्थीसिया: दिल-फेफड़ों के रोगियों के लिए सुरक्षित और कारगर तकनीक
पीजीआई के एनेस्थीसिया विशेषज्ञों ने एक नई और सुरक्षित एनेस्थीसिया तकनीक का खुलासा किया है, जो विशेष रूप से हृदय, फेफड़े और गुर्दा प्रत्यारोपण जैसे गंभीर मामलों से गुजर रहे रोगियों के लिए अत्यंत फायदेमंद साबित हो रही है। इस तकनीक को ‘सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया’ के नाम से जाना जाता है।
इस विधि की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें रोगी के पूरे शरीर को बेहोश करने के बजाय केवल ऑपरेशन किए जाने वाले विशिष्ट अंग या हिस्से को सुन्न किया जाता है। इसका मतलब है कि ऑपरेशन के दौरान मरीज सचेत रह सकता है और जरूरत पड़ने पर ही उसे गहरी बेहोशी दी जाती है। पीजीआई इस तकनीक को स्थापित करने वाला देश का चौथा संस्थान बन गया है, जहां अब तक इस विधि से 100 से अधिक सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस एनेस्थीसिया तकनीक में बेहोशी की दवाओं का प्रयोग कम होता है, जिससे रोगी को वेंटिलेटर की आवश्यकता भी कम पड़ती है और वह तेजी से स्वस्थ होता है। यह उन रोगियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जिन्हें पहले से हृदय या फेफड़ों से संबंधित बीमारियां हैं। सर्जरी के दौरान मरीज की हृदय गति और रक्तचाप भी स्थिर बना रहता है। यह तकनीक रीढ़, पेट, छाती, बच्चों की सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी और हड्डी से जुड़ी बीमारियों के ऑपरेशनों में भी इस्तेमाल की जा रही है।
इस नई तकनीक के विस्तार और प्रशिक्षण के लिए पीजीआई में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश भर के डॉक्टर भाग लेंगे और प्रशिक्षित होंगे। इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाना और मरीजों के लिए सुरक्षित उपचार विकल्प उपलब्ध कराना है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
