गैस की किल्लत: 45 दिन की बुकिंग ने बढ़ाई मुसीबत, आम आदमी परेशान
खाड़ी युद्ध का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। एलपीजी गैस की बुकिंग का समय बढ़कर 45 दिन हो जाने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इसके साथ ही, केवाईसी (KYC) और सर्वर की समस्याओं के चलते लोग गैस एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
व्यावसायिक गैस की किल्लत से परेशान होकर होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों ने कोयले और लकड़ी की भट्ठियां जलानी शुरू कर दी हैं। मांग बढ़ने के कारण लकड़ी और कोयले की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। फास्ट फूड, चाय, समोसा और चाट विक्रेता गैस न मिलने से बेहद परेशान हैं। कई छोटे दुकानदार अपना ठेला लगाना बंद करके दूसरा काम खोजने को विवश हो रहे हैं।
गैस की इस किल्लत का सीधा असर छोटे दुकानदारों पर पड़ रहा है। व्यावसायिक गैस न मिलने और छोटे सिलेंडरों के रिफिल न हो पाने के कारण कई फास्ट फूड की दुकानें बंद हो गई हैं। रूरा में फास्ट फूड का काम करने वाले सुरेश श्रीवास्तव ने बताया कि एक सप्ताह से गैस न मिलने के कारण उन्हें अपनी दुकान बंद रखनी पड़ी है। शिवली कस्बे के फास्ट फूड कारोबारी आकाश ने भी गैस सिलेंडर की समस्या के चलते दुकान बंद करने की बात कही। घरेलू गैस की बुकिंग भी अब 45 दिन बाद हो रही है, जिससे न केवल कारोबार बल्कि घर में खाना बनाने में भी दिक्कत आ रही है। इस स्थिति का सीधा असर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ रहा है, जो महंगाई और किल्लत के दोहरे मार झेल रहा है।
