राजधानी लखनऊ में शुक्रवार सुबह हुई मात्र 45 मिनट की बारिश ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) और शहर के अन्य प्रमुख अस्पतालों की जल निकासी व्यवस्था की खस्ताहाली को उजागर कर दिया। लारी कार्डियोलॉजी...
राजधानी लखनऊ में शुक्रवार सुबह हुई मात्र 45 मिनट की बारिश ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) और शहर के अन्य प्रमुख अस्पतालों की जल निकासी व्यवस्था की खस्ताहाली को उजागर कर दिया। लारी कार्डियोलॉजी विभाग से लेकर डफरिन अस्पताल तक हर जगह जलभराव की भयावह स्थिति देखी गई, जिससे गंभीर रोगियों, गर्भवती महिलाओं और चिकित्सा कर्मियों को गंदे पानी के बीच से गुजरने पर मजबूर होना पड़ा। यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि यह स्वच्छ चिकित्सा वातावरण को बाधित करती है।
लारी कार्डियोलॉजी विभाग में जलभराव के कारण अफरातफरी मच गई। नालियां चोक होने से वर्षा का पानी परिसर में फैल गया, जिससे भीषण बदबू फैल गई। प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों और उनके तीमारदारों को इस गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, जो हृदय रोग जैसी बीमारियों से पीड़ित कमजोर मरीजों के लिए अत्यंत खतरनाक है।
ट्रॉमा सेंटर में चल रहे निर्माण कार्य के कारण फैली गंदगी और कचरे ने बारिश के पानी के साथ मिलकर कैजुअल्टी वार्ड तक पहुंच गई, जिससे अस्वच्छ माहौल में मरीजों को इलाज कराना पड़ा।
डफरिन अस्पताल में स्थिति और भी चिंताजनक रही, जहां मुख्य गेट के पास जलभराव के कारण ओपीडी तक पहुंचना मुश्किल हो गया। गर्भवती महिलाओं को घुटनों तक भरे गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ा, जो उनके और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
सिविल और लोहिया अस्पताल भी आंशिक जलभराव से अछूते नहीं रहे, जिससे मरीजों और परिजनों को परेशानी हुई। यह स्पष्ट दर्शाता है कि शहर के सरकारी अस्पतालों में जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।
अस्पताल प्रशासन को इस समस्या की जानकारी होने और बार-बार शिकायतें मिलने के बावजूद, नालियों की मरम्मत और सफाई में लापरवाही बरती जा रही है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण हर बारिश में यही स्थिति उत्पन्न होती है। स्वास्थ्य कर्मियों और सामाजिक संगठनों ने तत्काल स्थायी समाधान की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो।