भाजपा संगठन में ‘BJP women reservation’ बना चुनौती, जिला कमेटियों के गठन में फंसा पेंच
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने संगठनात्मक ढांचे में महिलाओं को एक तिहाई प्रतिनिधित्व देने का फैसला किया है। यह निर्णय मोदी सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम की तर्ज पर लिया गया है। इसके तहत, 21 सदस्यीय जिला कार्यकारिणी में 7 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। हालांकि, पार्टी के इस कदम ने जिला कमेटियों के गठन की प्रक्रिया में एक बड़ा पेंच फंसा दिया है।
पार्टी के पर्यवेक्षकों और जिला संगठनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय और योग्य महिला कार्यकर्ताओं को ढूंढना है। कई जिलों में, विशेष रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले क्षेत्रों में, पर्याप्त संख्या में सक्रिय महिला चेहरे उपलब्ध नहीं हैं जो इन पदों की जिम्मेदारी संभाल सकें। पर्यवेक्षकों को प्रदेश नेतृत्व द्वारा दी गई चेकलिस्ट में महिला आरक्षण एक महत्वपूर्ण बिंदु था, लेकिन जमीनी स्तर पर इसे लागू करना मुश्किल साबित हो रहा है।
इस नए नियम ने उन पुरुष कार्यकर्ताओं की बेचैनी भी बढ़ा दी है जो लंबे समय से जिला कमेटियों में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। एक-तिहाई पद आरक्षित होने के कारण, कई वरिष्ठ और सक्रिय पुरुष कार्यकर्ताओं को इस बार सूची से बाहर होना पड़ सकता है। जिलाध्यक्षों का कहना है कि पार्टी की मंशा अच्छी है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जहां राजनीति अब भी पुरुष प्रधान है, वहां अचानक सात प्रभावशाली महिला चेहरों को ढूंढना एक बड़ी संगठनात्मक चुनौती है।
इस समस्या को देखते हुए, कई जिलाध्यक्षों और पर्यवेक्षकों ने प्रदेश नेतृत्व से संपर्क किया है। खबर है कि जहां ज्यादा दिक्कतें आ रही हैं, ऐसे जिलों में आरक्षण के मानकों में कुछ ढील दी जा सकती है। पार्टी नेतृत्व जिला इकाइयों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन जमीनी हकीकत को देखते हुए नियमों में आंशिक बदलाव की संभावना है।
