AIIMS डॉक्टर का खुलासा: 27% मेडिकल छात्र ‘depression’ से जूझ रहे, NMC सर्वे ने बढ़ाई चिंता
देश में मेडिकल छात्रों के बीच मानसिक स्वास्थ्य एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख डॉ. नंद कुमार ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के एक सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि 27.8% स्नातक और 31.3% परास्नातक मेडिकल छात्र डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों में बढ़ती आत्महत्याओं का मुख्य कारण बताया।
डॉ. नंद कुमार ने यह बात छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में आयोजित एक विशेष व्याख्यान के दौरान कही। व्याख्यान का विषय “बायोप्साइकोसोशल मॉडल ऑफ मेंटल हेल्थ” था। उन्होंने कहा कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को केवल मस्तिष्क या भावनाओं तक सीमित नहीं समझा जाना चाहिए, बल्कि यह उनके शारीरिक स्वास्थ्य, सामाजिक संबंधों और जीवन परिस्थितियों से भी गहराई से जुड़ा होता है।
डॉ. कुमार ने बताया कि पहले तनाव को जीवन की चुनौतियों के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब यह एक बीमारी का रूप ले चुका है। उन्होंने छात्रों में डिप्रेशन के मुख्य कारणों पर प्रकाश डाला, जिनमें शैक्षणिक तनाव (22.85%), नकारात्मक या पारिवारिक समस्याएं (34.28%), हिंसा से संबंधित कारण (22.85%) और सामाजिक एवं जीवनशैली से जुड़े मुद्दे (20%) शामिल हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने इस तरह के आयोजनों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों में डिप्रेशन प्रबंधन की शक्ति विकसित करने के लिए सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ऐसे कार्यक्रम होने चाहिए। डॉ. कुमार ने तनाव प्रबंधन के लिए सकारात्मक सोच, आत्म-जागरूकता और संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी।
