कानपुर में गैस संकट से ठप हुआ स्ट्रीट फूड कारोबार, ‘Kanpur news’ में वेंडर्स बोले- कोरोना से भी बुरा हाल
कानपुर शहर में रसोई गैस सिलेंडर की कमी ने स्ट्रीट फूड वेंडर्स की रोजी-रोटी पर सीधा असर डाला है। सालों से ठेले पर काम करने वाले वेंडर्स के लिए यह दौर कोरोना महामारी के समय से भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। शहर की गलियों में अब समोसे, चाय और चाट की खुशबू कम हो गई है, क्योंकि गैस की किल्लत के चलते कई ठेले बंद हो चुके हैं।
माल रोड पर 10 साल से फास्ट फूड का ठेला लगाने वाले मनोज का कहना है कि पहले भी कई संकट आए, लेकिन चूल्हा कभी नहीं बुझा। अब ग्राहक होने के बावजूद गैस नहीं मिल रही, जिससे दुकान बंद करनी पड़ रही है। आर्य नगर में नाश्ते का स्टॉल चलाने वाले राजकुमार कहते हैं कि उनकी जिंदगी रोज कमाओ, रोज खाओ की तर्ज पर चलती है, लेकिन गैस संकट ने उनकी आय का स्रोत ही छीन लिया है।
गैस की कमी के चलते कुछ वेंडर्स ने कोयला भट्टी का सहारा लिया है, लेकिन यह महंगा और असुविधाजनक है। मजबूरन, समोसे और पकौड़ी जैसे खाद्य पदार्थों के दामों में 5 से 10 रुपये की बढ़ोतरी करनी पड़ी है। वेंडर्स का कहना है कि यह बढ़ोतरी तब तक जारी रहेगी जब तक ईंधन की समस्या हल नहीं हो जाती।
गैस संकट का असर कैटरिंग व्यवसाय पर भी पड़ रहा है। एलपीजी सिलेंडर न मिलने पर कैटरर्स डीजल भट्टी की तलाश कर रहे हैं, लेकिन बाजार में इनकी भी कमी हो गई है। कानपुर कैटरर्स एसोसिएशन के महामंत्री अभिषेक तिवारी ने बताया कि डीजल भट्टी खरीदने के लिए एडवांस बुकिंग करनी पड़ रही है और 10-15 दिन में मिलने का आश्वासन दिया जा रहा है।
