रीतिकाल पर नेशनल कॉन्फ्रेंस: वक्ताओं ने बताया प्रेम और सांस्कृतिक चेतना का काल
श्रीमती बीडी जैन कन्या महाविद्यालय में दो दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। हिन्दुस्तानी एकेडमी के सहयोग से यह संगोष्ठी ‘रीतिकालीन साहित्य के विविध आयाम’ विषय पर आयोजित की गई। संगोष्ठी के प्रथम दिवस के सत्रों में वक्ताओं ने रीतिकाल को प्रेम, सौंदर्य और सांस्कृतिक वैभव का काल बताया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. आशु रानी, प्राचार्य डॉ. वंदना अग्रवाल, प्रो. विद्योत्तमा मिश्र, प्रो. उदय प्रताप सिंह, प्रो. उमापति दीक्षित और डॉ. राजीव द्विवेदी ने किया। मुख्य अतिथि प्रो. आशु रानी ने आधुनिक शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय जल्द ही ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर ऑल’ पाठ्यक्रम शुरू कर रहा है, ताकि एआई को सभी विषयों से एकीकृत किया जा सके। उन्होंने महाविद्यालय में सेक्शन 8 कंपनी की स्थापना कर छात्राओं को स्टार्टअप के लिए प्रोत्साहित करने की बात भी कही।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की प्रो. विद्योत्तमा मिश्र ने बीज वक्तव्य देते हुए रीतिकाल में स्त्री और नायिकाओं की मुख्य भूमिका को रेखांकित किया। विशिष्ट अतिथि डॉ. राजीव द्विवेदी, प्रो. उदय प्रताप सिंह और प्रो. उमापति दीक्षित ने रीतिकाल को प्रेम और सौंदर्य का काल बताया। प्रो. पूनम सिंह ने कवि बिहारी के काव्यों के माध्यम से दरबारी संस्कृति से अवगत कराया।
प्रथम सत्र का संचालन हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. शिखा श्रीधर ने किया। द्वितीय सत्र में रीतिकालीन सामाजिक संरचनाओं में स्त्री अस्मिता विषय पर चर्चा हुई, जिसकी अध्यक्षता केएमआई के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर ने की। प्रथम दिन के समापन पर सांस्कृतिक संध्या और काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ।
