कानपुर के अस्पतालों में LPG संकट, मरीजों के खाने पर असर, सिर्फ आज भर की गैस बची (Kanpur news)
कानपुर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में रसोई गैस (LPG) का संकट गहरा गया है। यह किल्लत अब घरों और बाजार से निकलकर सीधे मरीजों और तीमारदारों के भोजन व्यवस्था पर असर डाल रही है। उर्सला, हैलट और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में संचालित मेस और कैंटीन संचालकों के सामने कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी बड़ी चिंता बनती जा रही है। इन अस्पतालों में रोजाना हजारों मरीज, तीमारदार और मेडिकल छात्र भोजन के लिए इन मेस पर निर्भर रहते हैं।
उर्सला अस्पताल की मेस में एक समय में 600 मरीजों और तीमारदारों के लिए खाना बनाया जाता है। दिन भर में तीन बार में कुल 1800 लोगों का भोजन तैयार होता है। मेस संचालक ने अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट कर दिया है कि उसके पास सिर्फ शुक्रवार शाम तक की ही गैस उपलब्ध है। कार्यवाहक निदेशक बालेंद्र पाल ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है, हालांकि मेस संचालक ने भोजन व्यवस्था बाधित न होने का आश्वासन दिया है।
हैलट अस्पताल में भी गैस की किल्लत से गंभीर स्थिति बन रही है। यहां मेस में एक समय में 450 मरीज-तीमारदारों का खाना तैयार होता है। नोडल अफसर डॉ. विनय कटियार के अनुसार, मेस संचालक के पास अभी पांच दिन की गैस व्यवस्था है। इसके बाद उसने डीजल भट्टी के जरिए खाना तैयार करने का आश्वासन दिया है। रोटी के लिए बिजली से चलने वाली मशीन पहले से ही लगी है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज परिसर में चलने वाली मेस भी गैस संकट की चपेट में आने वाली हैं। यहां 1200 छात्र-छात्राओं के भोजन को लेकर प्रबंधन भी परेशान है। कैंपस प्रभारी डॉ. संतोष बर्मन के अनुसार, मेस संचालकों के पास महज दो दिन की गैस है। गैस सिलेंडर न होने की स्थिति में व्यवस्था बरकरार रखने के लिए डीजल भट्टी या कोयला-लकड़ी से खाना तैयार करने का दावा संचालकों ने किया है।
