UP में 3 नए लेबर कोड बिल प्रकाशित, 24 अप्रैल तक मांगे सुझाव; जानें क्या हैं बड़े बदलाव (UP Labor Code)
उत्तर प्रदेश सरकार ने 29 पुराने केंद्रीय श्रम कानूनों को समेकित करते हुए तीन नए लेबर कोड बिलों को प्रकाशित कर दिया है। इन बिलों पर आम जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। आम नागरिक 24 अप्रैल तक श्रमायुक्त कार्यालय कानपुर या प्रमुख सचिव श्रम विभाग लखनऊ के यहां अपने सुझाव जमा करा सकते हैं। इन सुझावों पर विचार-विमर्श के बाद श्रम विभाग अंतिम निर्णय लेगा और फिर इन बिलों को कानून के रूप में लागू किया जाएगा।
श्रमिकों के लिए बड़े बदलाव
नए लेबर कोड बिल में कर्मचारियों के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा असर उनकी सामाजिक सुरक्षा और वेतन पर पड़ेगा।
ग्रेच्युटी का नियम बदला: अब कर्मचारी केवल एक साल की नौकरी पूरी करने के बाद ही ग्रेच्युटी के हकदार होंगे। पहले यह अवधि पांच साल थी।
वेतन और भुगतान: सभी निजी कंपनियों के लिए हर महीने की 7 तारीख तक वेतन देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, नए नियमों के तहत मूल वेतन (Basic Salary) कुल सैलरी का कम से कम 50 प्रतिशत होना चाहिए।
गिग वर्कर्स को सुरक्षा: ऑनलाइन फूड डिलीवरी जैसी कंपनियों में काम करने वाले ‘गिग वर्कर्स’ को भी अब सामाजिक सुरक्षा और बीमा के दायरे में लाया गया है।
महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट: महिला कर्मियों को अब नाइट शिफ्ट में भी काम करने की अनुमति होगी, बशर्ते उनकी सहमति अनिवार्य हो।
छंटनी पर मुआवजा: नौकरी छूटने की स्थिति में कर्मचारी को 15 दिन के वेतन के बराबर मुआवजा मिलेगा, ताकि वे नई स्किल सीखकर दोबारा रोजगार पा सकें।
इन तीन नियमावलियों का प्रकाशन
उप्र सामाजिक सुरक्षा नियमावली 2026: इसमें भविष्य निधि, बीमा, पेंशन और मातृत्व लाभ को व्यवस्थित किया गया है।
उप्र वेतन संहिता नियमावली 2026: इसमें न्यूनतम मजदूरी, बोनस और समान मजदूरी से जुड़े कानूनों को मिलाया गया है।
उप्र औद्योगिक संबंध नियमावली 2026: यह श्रमिकों के विवादों के निस्तारण, ट्रेड यूनियन और छंटनी से जुड़े नियमों को सरल बनाती है।
एक चौथा कोड (ओएसएच कोड) अभी शासन के पास लंबित है और जल्द ही उस पर भी सुझाव मांगे जाएंगे।
