UP में कृषि ट्रैक्टरों का व्यवसायिक उपयोग, नियमों की अनदेखी से बढ़ रहे हादसे
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कृषि कार्यों के लिए पंजीकृत ट्रैक्टरों का व्यवसायिक उपयोग एक गंभीर समस्या बन चुका है। नियमों के अनुसार, इन वाहनों का उपयोग केवल खेती से संबंधित गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। हालांकि, बड़े पैमाने पर गल्ला कारोबारी, सीमेंट, सरिया और ईंट भट्ठा मालिक इन ट्रैक्टरों का इस्तेमाल भारी मात्रा में सामान ढोने के लिए कर रहे हैं। इस व्यवसायिक उपयोग के कारण ये वाहन अक्सर ओवरलोड होते हैं, जिससे सड़क हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
ट्रैक्टरों के इस अवैध उपयोग से न केवल सरकारी राजस्व को भारी चूना लग रहा है, बल्कि यह आम जनता की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है। कई बार इन ट्रालियों में मजदूरों और सवारियों को भी ले जाया जाता है, जिससे दुर्घटना की स्थिति में जान-माल का बड़ा नुकसान होता है। शिवली जैसे क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहां ओवरलोड ट्रालियां पलटने से कई लोगों की मौत हो चुकी है या वे गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
परिवहन विभाग के नियमों की अनदेखी कर हो रहे इस व्यवसायिक इस्तेमाल पर जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। बार-बार होने वाले हादसों के बावजूद, इन अवैध गतिविधियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। यह लापरवाही न केवल नियमों का उल्लंघन करने वालों को बढ़ावा दे रही है, बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रति सरकारी उदासीनता को भी दर्शाती है।
