सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट: कृषि भवन की कदीमी मस्जिद पर फिर मंडराए खतरे के बादल, वक्फ बोर्ड चिंतित
दिल्ली के दिल में, संसद भवन से कुछ ही दूरी पर स्थित 114 साल पुरानी कदीमी मस्जिद एक बार फिर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के कारण चर्चा में है। कृषि भवन परिसर में स्थित यह वक्फ की संपत्ति, जो एक उच्च-सुरक्षा क्षेत्र में होने के कारण आम जनता के लिए दुर्गम है, अब अपने अस्तित्व को लेकर चिंतित है। सरकार ने इसके सुरक्षित रहने का आश्वासन दिया है, लेकिन वक्फ बोर्ड से जुड़े लोगों को इस पर पूरा भरोसा नहीं है।
हेरिटेज पर खतरे की आशंका
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के पुनर्निर्माण पथ पर आने वाली इस मस्जिद को हटाए जाने की आशंका जताई जा रही है। एडवोकेट मशरूर खान, जो इस प्रोजेक्ट के तहत मस्जिदों की सुरक्षा के लिए हाई कोर्ट जाने वाले पहले व्यक्तियों में से हैं, ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सरकार के आश्वासन के बावजूद, पिछली बार उपराष्ट्रपति भवन की एक मस्जिद को बिना किसी पूर्व सूचना के हटा दिया गया था, जिससे उनका संदेह और बढ़ गया है।
ऐतिहासिक साक्ष्य और कानूनी लड़ाई
एडवोकेट मशरूर के अनुसार, 1912 के लुटियन के मूल नक्शे में भी इस कदीमी मस्जिद का उल्लेख है। यह मस्जिद ब्रिटिश काल से ही मौजूद है और इसे कभी नहीं गिराया गया। उन्होंने कहा कि अगर इसे गिराने की कोशिश की गई तो वे कानूनी रूप से इसका कड़ा विरोध करेंगे और इसके लिए आवश्यक कागजात जुटाए जा रहे हैं। उन्होंने सुनहरी बाग मस्जिद को बचाने का उदाहरण भी दिया, जिसे ट्रांसपेरेंसी के साथ बचाया गया था।
सरकारी आश्वासन और जमीनी हकीकत
सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की शुरुआत में ही, एडवोकेट मशरूर ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस प्रोजेक्ट के नक्शे में आने वाली छह मस्जिदों को सुरक्षित करने की मांग की थी। उस समय सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि फिलहाल इन्हें ध्वस्त करने की कोई योजना नहीं है। हालांकि, उपराष्ट्रपति भवन की मस्जिद को हटाए जाने के बाद, यह आश्वासन अब संदेह के घेरे में है। वर्तमान में, कृषि भवन और शास्त्री भवन को गिराने की खबरें आ रही हैं, और जारी किए गए टेंडर के नक्शे में मस्जिद का कोई उल्लेख नहीं है, जिससे चिंताएं और बढ़ गई हैं।
