लखनऊ में दुबग्गा फ्लाईओवर निर्माण का रास्ता साफ, लाखों को मिलेगी जाम से राहत (Lucknow flyover)
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कानपुर-हरदोई मार्ग पर दुबग्गा चौराहे पर बहुप्रतीक्षित फ्लाईओवर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस परियोजना के पूरा होने से लखनऊ और आसपास के लाखों लोगों को भीषण ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी। पीडब्ल्यूडी और सेतु निगम के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से नए सिरे से सर्वे कर इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी है, अब केवल अंतिम मंजूरी का इंतजार है। यह परियोजना शहर के यातायात प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
दुबग्गा फ्लाईओवर: एक महत्वपूर्ण परियोजना
लखनऊ के सांसद और देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के प्रस्ताव पर दुबग्गा फ्लाईओवर निर्माण को सेतु निगम ने अपनी कार्ययोजना वर्ष 2025-26 में शामिल किया था। हालांकि, कुछ तकनीकी कारणों से नए सिरे से सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करने की आवश्यकता महसूस हुई। रक्षा मंत्री के ओएसडी केपी सिंह ने 07 जनवरी को प्रस्तावित स्थल का दौरा किया, जिसके बाद प्रक्रिया में तेजी आई।
लागत और निर्माण विवरण
शासन के निर्देश पर पीडब्ल्यूडी और सेतु निगम के अधिकारियों की टीम ने 17 जनवरी को संयुक्त निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के बाद सेतु निर्माण के लिए नया एस्टीमेट तैयार किया गया और फरवरी में मंजूरी के लिए शासन को भेजा गया। प्रारंभिक कार्य योजना में प्रस्तावित निर्माण लागत 337.60 करोड़ रुपये थी, लेकिन नए सर्वे के बाद इसमें 16.39 करोड़ रुपये की कमी आई है, और अब यह लागत 321.21 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। अधिकारियों का कहना है कि शासन से मंजूरी मिलते ही निर्माण कार्य तत्काल शुरू कर दिया जाएगा।
यातायात पर प्रभाव और लाभ
दुबग्गा फ्लाईओवर तीन लेन का और 1181.72 मीटर लंबा होगा, जिसकी चौड़ाई 30 मीटर से अधिक होगी। यह फ्लाईओवर कानपुर बाईपास से दुबग्गा चौराहा होते हुए आईआईएम रोड की तरफ तक जाएगा। इसके बनने से दुबग्गा चौराहे पर लगने वाले अक्सर के जाम से मुक्ति मिलेगी। आगरा एक्सप्रेस-वे, कानपुर रोड और आईआईएम रोड से आने वाले यात्रियों का बहुमूल्य समय बचेगा। सर्वे रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि सेतु निर्माण में किसी ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान नहीं पहुंचेगा और न ही पर्यावरण वन्य जीव अधिनियम या ताज ट्रेपोजियम जोन के प्रतिबंधों का उल्लंघन होगा। इस परियोजना से चार लाख से अधिक लोग सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
