UP Vidhan Sabha News: मुफ्त बिजली, शिक्षामित्रों पर चर्चा; विपक्ष का हंगामा
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मौजूदा सत्र में आज कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर गरमागरम बहस देखने को मिली। सड़कों के नवीनीकरण, किसानों और विधवाओं को मुफ्त बिजली देने की घोषणाओं, और शिक्षामित्रों से जुड़े विषयों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आए। इस दौरान विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की, जिससे सदन में कई बार हंगामा भी हुआ। ये चर्चाएं सीधे तौर पर राज्य के लाखों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करती हैं।
शिक्षामित्रों के भविष्य पर चर्चा
बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षामित्रों की सेवाओं और उनके मानदेय का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठा। बेसिक शिक्षा मंत्री ने बताया कि शिक्षामित्रों की सेवाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और एसआईआर का काम पूरा होते ही उनकी ग्राम पंचायतों में तैनाती कर दी जाएगी। सरकार ने शिक्षामित्रों, शिक्षकों और अनुदेशकों के लिए पाँच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की मांग को भी मंजूरी दे दी है। मानदेय बढ़ाने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि सपा सरकार के दौरान कोई निर्णय नहीं लिया गया था, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे 3500 रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया है। उन्होंने शिक्षामित्रों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता दोहराई।
मुफ्त बिजली और ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियाँ
सदन में 48 लाख विधवा महिलाओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के वादे पर भी सवाल उठे। ऊर्जा मंत्री ने जवाब दिया कि सरकार समाज के सभी वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं चला रही है, जिसमें दिव्यांगजन, वृद्ध और बीपीएल परिवारों को कम दाम पर या मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य में 3 करोड़ 72 लाख उपभोक्ता हैं, जिनकी संख्या 2017 के मुकाबले काफी बढ़ी है। हालांकि, विपक्ष के नेता शिवपाल सिंह यादव ने ऊर्जा मंत्री के जवाब को असत्य बताते हुए नाराजगी व्यक्त की और कहा कि सपा सरकार के कार्यों को कम करके आंका जा रहा है। ओवरलोड ट्रांसफॉर्मर और जर्जर विद्युत तारों की समस्या पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा।
खादी आश्रम की जमीन और अतिक्रमण का मुद्दा
मेरठ में खादी आश्रम की जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा भी विधानसभा में गरमाया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सपा सरकार के दौरान कुछ लोगों को समझौते के तहत दी गई इस जमीन को अब सरकार अपने पक्ष में अधिग्रहीत करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि जमीन लेने वाले लोगों ने कॉलेज बनाने का वादा किया था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और अतुल प्रधान ने इस मामले में भूमाफियाओं द्वारा कब्जे और कार्रवाई न होने पर चिंता व्यक्त की, इसे पूर्वजों के खून-पसीने की जमीन बताया।
अधिकारियों के व्यवहार पर विधानसभा अध्यक्ष की सख्ती
विधायकों के फोन न उठाने वाले अधिकारियों पर भी विधानसभा में कड़ी नाराजगी जताई गई। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नेताओं का फोन न उठाने या जवाब न देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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