लखनऊ के राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज में 5 घंटे बिजली गुल, टॉर्च की रोशनी में देखे गए मरीज | Lucknow News
लखनऊ के टूड़ियागंज स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल में मंगलवार को लगभग पांच घंटे तक बिजली गुल रहने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई। सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक विद्युत आपूर्ति बाधित रहने के कारण ओपीडी में आए सैकड़ों मरीजों को बिना उचित जांच और इलाज के वापस लौटना पड़ा। डॉक्टरों को अंधेरे में टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में मरीजों को देखना पड़ा और पर्चों पर दवाएं लिखनी पड़ीं। इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियादी ढांचे की कमी को उजागर किया है, जिससे आम जनता को सीधे तौर पर परेशानी झेलनी पड़ी।
बिजली विभाग ने टूड़ियागंज फीडर पर अनुरक्षण कार्य के चलते विद्युत आपूर्ति बाधित करने की घोषणा पहले ही कर दी थी। इसके बावजूद, अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया। अस्पताल में जनरेटर होने के बावजूद, उसे महज आधे घंटे ही चलाया जा सका क्योंकि उसके लिए पर्याप्त ईंधन उपलब्ध नहीं था। बताया गया कि जनरेटर के ईंधन के लिए सालाना बजट मात्र 10 हजार रुपये है, जो इतने बड़े परिसर और पांच मंजिला ओपीडी बिल्डिंग के लिए अपर्याप्त है।
बिजली गुल होने से अस्पताल में खून की जांच समेत अन्य लैब कार्य पूरी तरह प्रभावित रहे। ओपीडी के पर्चे बनाने में भी कर्मचारियों को काफी दिक्कत हुई और लिफ्ट भी बंद रही। खून के नमूनों को सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज न चलने से भी समस्या उत्पन्न हुई। इसी दौरान, कॉलेज परिसर में बीएएमएस छात्रों का फेयरवेल कार्यक्रम भी था, जो अंधेरे में ही आयोजित करना पड़ा। छात्रों ने जनरेटर चलाने की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें अपने पैसों से डीजल डलवाने को कहा गया, जिससे वे निराश हो गए।
इस संबंध में, राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल के प्राचार्य डॉ. दिनेश कुमार मौर्य ने बताया कि परिसर में बिजली आपूर्ति बाधित थी और जरूरत के हिसाब से जनरेटर चलाया गया था। उन्होंने दावा किया कि सभी मरीजों के पर्चे बनाए गए और किसी को कोई परेशानी नहीं हुई। हालांकि, मरीजों और छात्रों के अनुभव उनकी बात से मेल नहीं खाते।
