वोटर लिस्ट विवाद पर EC का जवाब, ‘UP Voter List’ से नाम काटने के आरोप निराधार
उत्तर प्रदेश में ‘वोटर लिस्ट’ से नाम काटने के आरोपों पर अब चुनाव आयोग (EC) ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए कहा कि सकलडीहा के विधायक की पत्नी का नाम वोटर लिस्ट से नहीं काटा गया है। इसी तरह बलिया के सिकंदरपुर में 126 और प्रतापगढ़ के बाबागंज में 100 वोटरों के नाम काटने के आरोपों की जांच की गई, जो निराधार पाए गए।
रिनवा ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे का नाम मतदाता सूची से ऐसे ही नहीं कटवा सकता। इसके लिए आपत्ति फॉर्म-7 भरना होता है, जिसमें नाम, वोटर आईडी नंबर और नाम कटवाने का कारण बताना अनिवार्य है। फॉर्म भरने वाला व्यक्ति उसी विधानसभा क्षेत्र का निवासी होना चाहिए। कोई अज्ञात व्यक्ति इस प्रक्रिया के बिना किसी का नाम नहीं कटवा सकता।
इससे पहले सोमवार को समाजवादी पार्टी (सपा) मुख्यालय में अखिलेश यादव ने भाजपा पर फर्जी हस्ताक्षर के जरिए फॉर्म-7 भरवाकर ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के वोट कटवाने का आरोप लगाया था। अखिलेश ने दावा किया कि भाजपा की गुप्त बैठकों में उन लोकसभा सीटों पर वोट कटवाने का फैसला हुआ था, जहां सपा जीती थी। उन्होंने यह भी कहा कि सपा के बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) तक के नाम कटवा दिए गए हैं। औरैया के विधुना विधानसभा क्षेत्र में नंदलाल जैसे अनपढ़ व्यक्ति के नाम पर फर्जी हस्ताक्षर कर वोट कटवाने का मामला सामने आया। अयोध्या और अन्य जिलों में भी बड़े पैमाने पर फर्जी हस्ताक्षर से वोट काटे जा रहे हैं।
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि यादव और मुस्लिम समुदाय के अधिक वोट काटे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सपा ने 47 फॉर्म-7 भरे, जबकि भाजपा ने 1097 से अधिक और अज्ञात लोगों ने 1.28 लाख से अधिक फॉर्म-7 भरे हैं, जो उनके अनुसार भाजपा से जुड़े लोग हैं। अखिलेश ने निर्वाचन आयोग पर बीएलए को उचित ट्रेनिंग न देने और गड़बड़ी करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई न करने का भी आरोप लगाया। सपा का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को निर्वाचन आयोग को ज्ञापन सौंपेगा और इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाएगा। इस पूरे विवाद से राज्य में रोजगार, गरीबी और महंगाई जैसे बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकने की आशंका जताई जा रही है।
