यूपी विधानसभा में विपक्ष का हंगामा: नेता प्रतिपक्ष बोले- अधिकारी दलाली में व्यस्त, फोन नहीं उठाते | UP Vidhan Sabha News
उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। जहां सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिना रहा है, वहीं विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास कर रहा है। इस दौरान, कार्यपालिका और जनप्रतिनिधियों के संबंधों को लेकर सदन में गंभीर आरोप लगाए गए, जिससे प्रदेश में सुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं।
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सदन में आरोप लगाया कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन तक नहीं उठाते और दलाली में व्यस्त रहते हैं। उन्होंने इस स्थिति को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अनुचित बताते हुए कहा कि कार्यपालिका का विधायिका पर हावी होना सदन की गरिमा का उल्लंघन है। उन्होंने पीठ से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की। समाजवादी पार्टी के विधायक कमाल अख़्तर ने भी इन आरोपों का समर्थन करते हुए कहा कि स्थिति इतनी खराब है कि सत्ता पक्ष के विधायकों को भी धरने पर बैठना पड़ता है। उन्होंने सरकार से नौकरशाही पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने वाली व्यवस्था बनाने की मांग की, ताकि सभी दलों के विधायकों की सुनवाई हो सके।
इसी बीच, कांग्रेस पार्टी ने विभिन्न मुद्दों को लेकर उत्तर प्रदेश विधानभवन के घेराव की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद पुलिस और प्रशासनिक अमला अलर्ट हो गया और सोमवार देर रात से मंगलवार सुबह तक कांग्रेस के कई नेताओं को हाउस अरेस्ट कर लिया गया। उनके घरों के बाहर पुलिस का पहरा लगा दिया गया और उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई।
सदन में शिक्षा से जुड़े मुद्दे भी उठे। समाजवादी पार्टी की विधायक रागिनी सोनकर ने एडेड स्कूलों में विज्ञान विषय के शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया और सरकार से सवाल किया कि राम राज्य की बात करने वाली सरकार में विज्ञान के शिक्षक क्यों नहीं हैं। उन्होंने सेवानिवृत्त प्रधानाचार्यों की भर्तियों पर भी सवाल उठाए। इस पर मंत्री गुलाबो देवी ने शायरी के अंदाज में जवाब देते हुए सरकार की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके अतिरिक्त, सपा विधायक इंजीनियर सचिन यादव के सवाल के जवाब में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के सम्मान में भाजपा सरकार द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख किया, जिसमें उनके जन्मस्थान से लेकर महापरिनिर्वाण स्थल तक को ‘पंचतीर्थ’ के रूप में विकसित करना शामिल है।
